Himachal Pradesh पर टूटा कुदरत का कहर, कुल्लू में भरभरा कर ढहे मकान, शिमला में भी बड़ी बर्बादी

By नीरज कुमार दुबे | Aug 24, 2023

हिमाचल प्रदेश पर कुदरत की बहुत बुरी मार पड़ रही है। लगातार जिस तरह भारी वर्षा से इस पहाड़ी राज्य में जानमाल का नुकसान हो रहा है उससे हर कोई दहशत में ही नजर आ रहा है। कुल्लू जिले के अन्नी शहर में भूस्खलन के कारण कई इमारतें ढहने का जो ताजा वीडियो सामने आया है वह दिखा रहा है कि प्रकृति के प्रकोप के आगे मजबूत से मजबूत इमारत ताश के पत्तों की तरह ढह जा रही है। बताया जा रहा है कि इन इमारतों को असुरक्षित मानते हुए प्रशासन ने तीन दिन पहले ही खाली कराया था। यह इमारतें जब ढहीं उस समय उसमें कोई व्यक्ति मौजूद नहीं था।

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बारिश के कारण शिमला शहर बुरी तरह प्रभावित हुआ, भूस्खलन और उखड़े पेड़ों के कारण मुख्य कार्ट रोड और साथ ही शिमला-मेहली बाईपास कई स्थानों पर अवरुद्ध हो गया। कई घरों में दरारें भी आ गई हैं और एहतियात के तौर पर लोगों को वहां से हटा दिया गया है। शिमला जिले के पुलिस अधीक्षक संजीव कुमार गांधी ने लोगों से अनावश्यक यात्रा नहीं करने का अनुरोध किया है। शिमला में भारी बारिश के चलते कई जगह जलजमाव की स्थिति हो गयी है। आईजीएमसी अस्पताल के ओपीडी वार्ड में भी पानी घुस गया जिससे मरीजों और डॉक्टरों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा।

हम आपको यह भी बता दें कि हिमाचल प्रदेश में इसी महीने बारिश से संबंधित घटनाओं में अब तक 120 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई है, जबकि 24 जून को हिमाचल प्रदेश में मानसून की शुरुआत के बाद से कुल 238 लोगों की अब तक मौत हो चुकी है और 40 लोग अब भी लापता हैं। मौसम विभाग ने कांगड़ा, कुल्लू, मंडी, शिमला, सोलन और सिरमौर जिलों के कुछ हिस्सों के लिए ‘रेड अलर्ट’ जारी किया था। विभाग ने आज के लिए भारी से बहुत भारी बारिश की नारंगी चेतावनी भी जारी की है। 

इस बीच, हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा है कि राज्य सरकार ने ब्यास नदी घाटी की बारहमासी और गैर-बारहमासी, दोनों छोटी नदियों एवं उनकी उसकी सहायक नदियों में स्टोन क्रशर के प्रयोग को तुरंत प्रभाव से बंद करने का निर्णय लिया है। एक सरकारी बयान में यहां कहा गया है कि मानसून के दौरान पारिस्थितिकी में खतरनाक परिवर्तन को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है। विज्ञप्ति में कहा गया है कि यह निर्णय मानव बस्तियों और बुनियादी ढांचे की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा और राज्य की नाजुक पारिस्थितिकी और पर्यावरण को संरक्षित करेगा। सुक्खू ने कहा कि पर्यावरण, विज्ञान और प्रौद्योगिकी तथा जलवायु परिवर्तन विभाग को इस प्रकार की विनाशकारी स्थिति उत्पन्न करने वाले कारकों की पहचान करने के लिए आई.आई.टी., एन.आई.टी., अनुसंधान एवं विकास संस्थानों और विश्वविद्यालयों के विशेषज्ञों से तुरंत उच्च स्तरीय विशेषज्ञ परामर्श लेने के निर्देश दिए गए हैं।

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