आर्यन खान को सलाखों में डालने वालों को नहीं छोड़ेंगे शाहरुख खान, NCB के खिलाफ एक्शन की तैयारी में लीगल टीम

By रेनू तिवारी | Nov 23, 2021

बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा आर्यन खान को 28 दिनों बाद जमानत दी गयी। कोर्ट ने आर्यन खान को जमानत देने के दौरान कई शर्ते रखी थी जिसमें से एक यह थी कि आर्यन खान देश छोड़ कर बाहर नहीं जा सकते और उन्हें एनसीबी के द्वारा बुलाए जाने पर पेश होना होगा। अब जमानत के बाद आर्यन खान की गिरफ्तारी को लेकर एनसीबी पर ही उंगलियां उठने लगी हैं। जमानत मिलने के बाद यह माना जा रहा है कि एनसीबी के पास आर्यन के खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं थे इस लिए कोर्ट ने उन्हें जमानत दी। ताजा रिपोर्ट के अनुसार यह खबरे आ रही हैं कि नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) के खिलाफ शाहरूख खान एक्शन लेने की प्लानिंग कर रहे हैं। उन्होंने इसके लिए अपनी लीगल टीम तैयार की है। रिपोर्ट्स के मुताबिक किंग खान की लीगल टीम ने अब सुपरस्टार को एनसीबी के जोनल डायरेक्टर समीर वानखेड़े, जो क्रूज-ड्रग केस का नेतृत्व कर रहे थे, और उनके बेटे आर्यन पर झूठा आरोप लगाने वाले अन्य लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की प्लानिंग में हैं।

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इसमें यह भी कहा गया कि एनडीपीएस अधिनियम की धारा 67 के तहत स्वापक नियंत्रण ब्यूरो (एनसीबी) ने आर्यन खान का जो स्वीकृति बयान दर्ज किया है, उसपर केवल जांच के मकसद से गौर किया जा सकता है और उसका इस्तेमाल यह निष्कर्ष निकालने के लिए हथियार के तौर पर नहीं किया जा सकता कि आरोपी ने एनडीपीएस अधिनियम के तहत कोई अपराध किया है। चौदह पृष्ठों वाले आदेश में कहा गया,‘‘ ऐसा कोई भी सकारात्मक साक्ष्य रिकॉर्ड में नहीं है जो अदालत को इस बात पर राजी कर सके कि समान मंशा वाले सभी आरोपी गैरकानूनी कृत्य करने के लिए राजी हो गए।’’ अदालत ने एनसीबी ने इस तर्क को खारिज कर दिया कि सभी आरोपियों के मामलों पर विचार साथ में होना चाहिए। आदेश में कहा गया कि तीनों ने पहले ही लगभग 25 दिन कैद में काट लिए हैं और अभियोजन ने अभी तक उनकी चिकित्सीय जांच तक नहीं कराई है ताकि यह पता चल सके कि उन्होंने मादक पदार्थ का सेवन किया था कि नहीं। 

आदेश में यह भी कहा गया कि आर्यन खान के पास से कोई भी आपत्तिजनक पदार्थ नहीं मिला है और इस तथ्य पर कोई विवाद भी नहीं है। मर्चेंट और धमेचा के पास से अवैध मादक पदार्थ पाया गया, जिसकी मात्रा बेहद कम थी। आदेश के अनुसार, ‘‘अदालत को ऐसे मामलों में पहले यह सुनिश्चित करने की जरूरत है कि क्या इस बात के पर्याप्त सुबूत हैं कि वह प्रथम दृष्टया यह तय कर सके कि आवेदकों (आर्यन खान, मर्चेंट और धमेचा) ने साजिश रची और यह कि अभियोजन एनडीपीएस अधिनियम की धारा 29के प्रावधान लगाने में सही है।’’

न्यायमूर्ति सांब्रे ने कहा कि अदालत को इस तथ्य के प्रति संवेदनशील होने की जरूरत होती है कि आरोपियों के खिलाफ साजिश का मामला साबित करने के लिए साक्ष्य के तौर पर कुछ सामग्री मौजूद हो। अदालत ने कहा,‘‘ केवल इसलिए कि आवेदक क्रूज पर यात्रा कर रहे थे, एनडीपीएस अधिनियम की धारा 29 के प्रावधान लगाने को संतोषजनक आधार नहीं कहा जा सकता।’’ न्यायमूर्ति सांब्रे ने कहा कि अगर अभियोजन के मामले पर गौर किया भी जाए तो भी इस प्रकार के अपराध में सजा एक वर्ष से अधिक नहीं है।

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