By अनन्या मिश्रा | Jul 24, 2026
हिंदू धर्म में हर दिन किसी न किसी देवी-देवता को समर्पित होता है। ठीक इसी तरह शनिवार का दिन न्याय के देवता शनिदेव को समर्पित होता है। ऐसे में अगर आप शनिदेव की साढ़ेसाती, ढैय्या या फिर शनि दोष से परेशान हैं। तो आपको शनिदेव के कुछ मंत्रों का जाप करना चाहिए।
ॐ शं शनैश्चराय नमः।
ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः।
ॐ सूर्यात्मजाय विद्महे मृत्युरूपाय धीमहि तन्नः सौरिः प्रचोदयात्॥
ॐ नीलांजन समाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम्।
छाया मार्तण्डसंभूतं तं नमामि शनैश्चरम्॥
ॐ शन्नोदेवीर भिष्टयऽआपो भवन्तु पीतये शंय्योरभिस्त्रवन्तुनः।
शं॥
ऊँ त्रयम्बकं यजामहे सुगंधिम पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुक मिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मा मृतात्।।
ॐ शन्नोदेवीरभिष्टय आपो भवन्तु पीतये।संयोरभिश्रवन्तु न:। ऊँ शं शनैश्चराय नमः।।
ऊँ नीलांजनसमाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम्। छायामार्तण्डसंभूतं तं नमामिशानश्चराम।।
ॐ शन्नोदेवीरभिस्ताय आपो भवन्तु पीतये
शनयोरभिस्रवन्तु नः, ॐ समं शनैश्चराय नमः।
ॐ नीलांजनसमाभासं रविपुत्रं यमाग्रजं
छायामार्तण्डसंभूतं तम नमामि शनैश्चरम।
अगर आप भी शनि दोष, ढैय्या और साढ़ेसाती के कष्टों से परेशान हैं, तो आप इन कुछ विशेष उपायों को अपनाकर राहत पा सकते हैं।
हर शनिवार को सुबह स्नान आदि करने के बाद पीपल के पेड़ की जड़ में जल अर्पित करना चाहिए और पेड़ की 7 बार परिक्रमा करें। यह उपाय शनि दोष के प्रभाव को कम करता है।
शनिवार को शनिदेव की विधिविधान से पूजा-अर्चना करना चाहिए और श्रद्धा से 'शनि स्तुति' का पाठ करना चाहिए।
धार्मिक मान्यता यह भी है कि शनि देव हनुमान जी के भक्तों को कष्ट नहीं पहुंचाते हैं। इसलिए शनिवार को हनुमान जी की पूजा करें और नियमित रूप से हनुमान चालीसा का पाठ करना चाहिए।
शनिदेव की कृपा पाने के लिए हर शनिवार को अपने सामर्थ्य के मुताबिक काले तिल, काले रंग के कपड़े, साबुत उड़द, सरसों का तेल और गुड़ आदि का दान करना चाहिए।
ऐसे कार्यों या आचरण से दूर रहना चाहिए, जिससे शनिदेव रुष्ट हों। गरीबों, असहायों और बुजुर्गों आदि का अपमान नहीं करना चाहिए।
वहीं अच्छे कर्म करने वाले लोगों पर शनिदेव की हमेशा कृपा बनी रहती है। इसलिए अपने कर्मों को अच्छा रखना चाहिए।