By रेनू तिवारी | Jul 14, 2026
लंदन के ऐतिहासिक लॉर्ड्स मैदान पर भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने इंग्लैंड को 270 रनों के विशाल अंतर से हराकर एक नया इतिहास रच दिया है। इस एकमात्र टेस्ट मैच में भारत ने शुरू से लेकर अंत तक अपना दबदबा बनाए रखा। इस शानदार और अभूतपूर्व जीत की सराहना करते हुए पूर्व भारतीय कप्तान शांता रंगास्वामी ने कहा है कि इस प्रदर्शन ने महिला क्रिकेट में भी लंबी अवधि के प्रारूप (टेस्ट क्रिकेट) के अधिक मैच आयोजित करने की मांग को बेहद मजबूत कर दिया है। इसके साथ ही उन्होंने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) से घरेलू स्तर पर लाल गेंद की क्रिकेट को दोबारा पूरी तरह शुरू करने का आग्रह किया है।
उन्होंने कहा, ‘‘भारत ने इंग्लैंड को 270 रन की बड़े अंतर से हराया तथा उसकी दो खिलाड़ियों ने सम्मान बोर्ड पर अपना नाम दर्ज कराया। मुझे लगता है कि इससे बेहतर और कुछ नहीं हो सकता।’’ इस पूर्व ऑलराउंडर का मानना है कि भारत के प्रदर्शन ने मजबूत तकनीक वाले खिलाड़ियों को तैयार करने में लाल गेंद के क्रिकेट के महत्व को उजागर किया है। रंगास्वामी ने कहा, ‘‘जब मैं बीसीसीआई की शीर्ष परिषद की सदस्य थी तो मैं अक्सर महिला क्रिकेट में लंबी अवधि के प्रारूप की प्रतियोगिताओं के आयोजन पर जोर देती थी। पिछले साल इसे फिर से शुरू किया गया लेकिन केवल अंतरक्षेत्रीय स्तर पर और वह भी नॉकआउट प्रारूप में।’’
उन्होंने कहा, ‘‘ मेरा बीसीसीआई से आग्रह है कि वह अंडर-19, अंडर-23 और सीनियर टीमों के लिए लंबी अवधि के प्रारूप की प्रतियोगिताओं को शुरू करे, जैसा कि कई साल पहले किया जाता था। हमारी महिला क्रिकेटरों के कौशल को निखारने के लिए यही एकमात्र तरीका है।’’ रंगास्वामी ने पुरुषों के खेल से तुलना करते हुए कहा कि लंबी अवधि के प्रारूप का क्रिकेट के बेहतर तकनीक वाले क्रिकेटर तैयार करने में मदद करता है।
उन्होंने कहा, ‘‘विराट कोहली या स्टीव स्मिथ जैसे खिलाड़ी अपनी उत्कृष्ट तकनीक के कारण तीनों प्रारूपों में अच्छा प्रदर्शन कर सकते हैं। घरेलू क्रिकेट में हर स्तर पर इसी तकनीक को विकसित करने की जरूरत है।’’ रंगास्वामी ने कहा, ‘‘मैंने यास्तिका से बात की। वह चोट से उबरकर भी अविश्वसनीय रूप से अच्छा प्रदर्शन कर रही है। इसके लिए बहुत आत्मविश्वास की जरूरत होती है। उसने शानदार खेल दिखाया।
News Source - PTI Information
यह खबर पीटीआई भाषा द्वारा प्रसारित की गयी है लेखक ने बस मामूली शाब्दिक और व्याकरण से संबंधित बदलाव किए हैं-