Sharad Purnima की रात खुले आसमान में खीर क्यों रखी जाती है, क्या है धार्मिक मान्यता

By दिव्यांशी भदौरिया | Oct 21, 2026

सनातन धर्म में शरद पूर्णिमा का विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस रात को चंद्रमा अपनी 16 कलाओं से परिपूर्ण होता है और उसकी शीतल चांदनी से अमृत वर्षा होती है। माना जाता है कि लोग इस दिन चंद्रमा की रोशनी में खीर रखते हैं जिससे यह अमृत उस खीर में गिरे और खीर में भी अमृत का प्रभाव होता है।

शरद पूर्णिमा पर खीर रखने की परंपरा

धार्मिक मान्यता के अनुसार, शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा की किरणें विशेष रूप से शुभ और शीतल मानी जाती है। माना जाता है कि इस समय खुले आसमान के नीचे रखी खीर में चंद्रमा की सकारात्मक ऊर्जा किरणों के माध्यम से खीर में पड़ती हैं और वो प्रसाद रूप अमृत में बदल जाती है।

फिर इस खीर को अगले दिन प्रसाद के तौर पर सुबह परिवार में सभी लोग एक साथ ग्रहण करते हैं। लेकिन हर जगह इसे मनाने की तरीके और इससे संबंधित मान्यताएं अलग हैं और शरद पूर्णिमा पर 'अमृत वर्षा' की धारणा मुख्य रुप से धार्मिक और लोकविश्वासों से संबंधित है।

शरद पूर्णिमा का वैज्ञानिक और आयुर्वेदिक आधार

आपको बताते चलें कि खगोलीय स्थिति और चंद्र किरणों से जुड़ा धार्मिक व वैज्ञानिक पहलू यह है कि शरद पूर्णिमा पर चंद्रमा पृथ्वी के बेहद करीब होता है और अपनी 16 कलाओं से पूर्ण होता है। शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा की किरणों में विशेष ऊर्जा और शीतलता होती है। इसके पीछे कारण होता है कि इस रात चंद्रमा से 16 कलाओं के रुप में किरणें निकलती है, जो कि अमृत के रुप में होती है।

चांदी का पात्र में खीर रखने का महत्व

ज्योतिष के अनुसार, शरद पूर्णिमा की रात खीर को चांदी के पात्र में खुले आसमान के नीचे रखा जाता है। वहीं, चांदी में एंटी-बैक्टीरियल गुण होते हैं, जो चंद्र किरणों के साथ मिलकर खीर में औषधीय गुणों की वृद्धि करते हैं। लेकिन रात के समय सचमुच में चंद्रमा से अमृत की वर्षा होती है। जिसका कोई भी वैज्ञानिक आधार नहीं है और ये मान्यता कई सदियों से चलती आ रही है।

चंद्रमा की रोशनी और शीतलता

हिंदू कैलेंडर के अनुसार, शरद पूर्णिमा आश्विन मास की पूर्णिमा को आती है। इस समय में मौसम में काफी बदलाव देखने को मिलते हैं और रातें भी ठंडी  होने लगती है। धीरे-धीरे ठंड बढ़ने लगती है। चंद्रमा की रोशनी को भारतीय परंपरा में शीतलता और मानसिक शांति से जोड़ा जाता है।

वैसे इस रात को चंद्रमा पृथ्वी के सबसे ज्यादा करीब होता है और इसी वजह से उसके शीतल किरणों का लाभ सबसे अधिक धरती पर होता है। इसी कारण से कहा जाता है कि चंद्रमा से अमृत की वर्षा होती है।

बता दें कि, शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा से अमृत बरसने और रोशनी में खीर रखने का महत्व धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक पंरपरा और चंद्रमा से संबंधित मान्यताओं पर आधारित है।

प्रमुख खबरें

मध्य पूर्व तनाव के बीच Crude Oil उछला, Brent Crude 110 डॉलर के पार पहुंचा

Adani Green Energy का शुद्ध लाभ 16% बढ़कर 747 करोड़ रुपये पर पहुंचा

पत्नी Hailey के साथ म्यूजिक नाइट पर निकले Justin Bieber, शेयर किया फोटो डंप

MP में CM Mohan Yadav ने बांटे 954 अनुकंपा नियुक्ति पत्र, 200 नए सांदीपनि विद्यालय भवनों को भी मिली मंजूरी