शशि थरूर ने लोकतंत्र काले अध्याय को किया याद, क्या कांग्रेस पर किया कटाक्ष? कहा- आपातकाल एक सबक है

By रेनू तिवारी | Jul 10, 2025

आपातकाल की तीखी आलोचना करते हुए एक लेख में, कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा कि यह लेख दर्शाता है कि स्वतंत्रता का हनन कैसे होता है और इस बात पर प्रकाश डालता है कि कैसे दुनिया "मानवाधिकारों के हनन की भयावह सूची" से अनजान रही। प्रोजेक्ट सिंडिकेट द्वारा प्रकाशित इस लेख में, थरूर ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के सत्तावादी दृष्टिकोण ने सार्वजनिक जीवन को भय और दमन की स्थिति में धकेल दिया। साथ ही, उन्होंने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि आज का भारत "1975 का भारत नहीं है"।

इसे भी पढ़ें: जापानी प्रतिनिधिमंडल ने उत्तर प्रदेश में खनिज सहयोग की संभावनाएं तलाशीं

तिरुवनंतपुरम के सांसद ने लिखा, ‘‘इंदिरा गांधी के पुत्र संजय गांधी ने जबरन नसबंदी अभियान चलाया जो इसका एक संगीन उदाहरण बन गया। पिछड़े ग्रामीण इलाकों में मनमाने लक्ष्यों को पूरा करने के लिए हिंसा और बल का इस्तेमाल किया गया। नयी दिल्ली जैसे शहरों में झुग्गियों को बेरहमी से ध्वस्त कर उनका सफाया कर दिया गया। हजारों लोग बेघर हो गए। उनके कल्याण पर ध्यान नहीं दिया गया।’’ उन्होंने कहा कि लोकतंत्र कोई ऐसी चीज नहीं है जिसे हल्के में लिया जाए, यह एक अनमोल विरासत है जिसे निरंतर पोषित और संरक्षित किया जाना चाहिए।

इसे भी पढ़ें: जमीन पर कब्जे की कोशिश के लिए दलित समाज के छह लोगों के खिलाफ मामला दर्ज

थरूर ने कहा, ‘‘यह सभी को हमेशा याद दिलाता रहे।’’ थरूर के अनुसार, आज का भारत 1975 का भारत नहीं है। उन्होंने कहा, ‘‘हम ज्यादा आत्मविश्वासी, ज्यादा विकसित और कई मायनों में ज्यादा मजबूत लोकतंत्र हैं। फिर भी, आपातकाल के सबक चिंताजनक रूप से प्रासंगिक बने हुए हैं।’’ थरूर ने चेतावनी दी कि सत्ता को केंद्रीकृत करने, असहमति को दबाने और संवैधानिक रक्षात्मक उपायों को दरकिनार करने की प्रवृत्ति विभिन्न रूपों में फिर से उभर सकती है। उन्होंने कहा, ‘‘अक्सर ऐसी प्रवृत्तियों को राष्ट्रीय हित या स्थिरता के नाम पर उचित ठहराया जा सकता है। इस लिहाज से आपातकाल एक कड़ी चेतावनी है। लोकतंत्र के प्रहरियों को हमेशा सतर्क रहना चाहिए।

प्रमुख खबरें

Punjab Governor Gulab Chand Kataria ने Fazilka बॉर्डर पर BSF पोस्ट का दौरा किया

Eknath Shinde ने Pune मामले में फास्ट ट्रैक सुनवाई और फांसी की सजा का दिया आश्वासन

Sajad Lone ने Rahul Gandhi से Kashmir में Pellet Gun पीड़ितों पर सवाल पूछा

Kailash Mansarovar Yatra संपन्न: लिपुलेख से 44 यात्रियों का अंतिम जत्था उत्तराखंड लौटा