केरल कांग्रेस से शशि थरूर ने कहा- मोदी सरकार का मुखर आलोचक हूं, कभी सही नहीं ठहराया

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Aug 29, 2019

तिरुवनंतपुरम। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कथित प्रशंसा में दिये गये बयान से उठे विवाद के बाद बुधवार को कहा कि उन्होंने कभी मोदी को सही नहीं ठहराया, बल्कि वह भाजपा सरकार के मुखर आलोचक रहे हैं। मोदी की कथित प्रशंसा पर केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष मुल्लापल्ली रामचंद्रन द्वारा मांगे गये स्पष्टीकरण पर ईमेल से दिये जवाब में पूर्व केंद्रीय मंत्री थरूर ने कहा, ‘‘मैं मोदी सरकार का मुखर आलोचक रहा हूं और उम्मीद करता हूं कि मैं सकारात्मक आलोचक रहा हूं।’’ थरूर ने बयान दिया था कि प्रधानमंत्री अगर सही काम कर रहे हैं तो उनकी प्रशंसा होनी चाहिए। इसके बाद राज्य की राजनीति में भूचाल आ गया।  इस पर रामचंद्रन ने थरूर को भेजे ईमेल में कहा था कि पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की 75वीं जयंती के समारोह में नरेंद्र मोदी पर कांग्रेस का रुख व्यक्त कर चुकी हैं। 

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कांग्रेस सांसद ने कहा, ‘‘क्या केरल में मेरा कोई भी आलोचक कह सकता है कि उन्होंने ऐसा किया है?’’ उन्होंने कहा, ‘‘मैंने मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में सबसे समग्र और सफल आलोचना के लिए लेखक के तौर पर अपनी कलम और प्रामाणिकता की शक्ति का इस्तेमाल किया।’’ थरूर के कथित मोदी समर्थक बयान पर उनकी आलोचना राज्य विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रमेश चेन्निथला और पार्टी के तीन सांसदों के. मुरलीधरन, बेनी बेहनान तथा टी एन प्रतापन ने की है। अपने बयान पर उठे विवाद के संदर्भ में थरूर ने कहा कि यह एक ट्वीट पर बिना सिर-पैर की रिपोर्टिंग पर आई अतिवादी प्रतिक्रियाओं पर आधारित विवाद है। उन्होंने कहा, ‘‘मैंने जयराम रमेश और अभिषेक सिंघवी के समर्थन करने वाले बयान जारी किये जिनकी पार्टी के प्रभावशाली नेताओं और एआईसीसी के आधिकारिक प्रवक्ताओं के तौर पर पहचान से आप और मैं, दोनों वाकिफ हैं।’’ थरूर ने कहा कि वह पिछले छह साल से दलील दे रहे हैं कि ‘‘मोदी जब भी कुछ अच्छा बोलते हैं या करते हैं तो उनकी प्रशंसा की जानी चाहिए, इससे उनकी गलती पर हमारी आलोचनाओं की भी साख बढ़ेगी।’’ उन्होंने कहा, ‘‘मोदी ने प्रशंसा लायक बहुत कम काम किया है। लेकिन वह भारत में अपने वोट प्रतिशत को 2014 के 31 प्रतिशत से 2019 में 37 फीसदी तक बढ़ाने में प्रभावी रहे हैं और ऐसे में दोनों ही चुनावों में करीब 19 प्रतिशत पर सिमटी रही कांग्रेस में हम लोगों को समझना चाहिए कि ऐसा क्यों हुआ।’’ 

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