By रेनू तिवारी | Jun 02, 2026
शनिवार रात दक्षिण दिल्ली के साकेत मेट्रो स्टेशन के पास एक पांच-मंजिला इमारत ढहने से छह लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। इस हादसे ने कई परिवारों को उम्र भर का गम दिया है, लेकिन इनमें एक नाम ऐसा भी है जिसकी शहादत पर पूरा छात्र समुदाय आंसू बहा रहा है। वह नाम है 'पार्वती ओझा' का, जो हादसे के वक्त खुद भागने के बजाय वहां मौजूद छात्रों की जान बचा रही थीं। मूल रूप से नेपाल की रहने वाली पार्वती पिछले दो दशकों से दिल्ली में रह रही थीं। वह ढही हुई इमारत के ठीक बगल में एक छोटी सी कैंटीन चलाती थीं। घर से दूर दिल्ली में पढ़ाई या नौकरी की तलाश में आए अनगिनत युवाओं के लिए वह सिर्फ एक कैंटीन मालकिन नहीं, बल्कि एक माँ जैसी थीं, जो उन्हें न सिर्फ किफायती खाना खिलाती थीं बल्कि सुख-दुख में उनका संबल भी बनती थीं।
आखिरी वक्त में भी निभाया 'माँ' का फर्ज
पार्वती की बेटी नीलम ने रुंधे गले से बताया कि उनकी माँ आखिरी वक्त में भी वही कर रही थीं, जो उन्होंने जिंदगी भर किया—दूसरों का ख्याल रखना। प्रत्यक्षदर्शियों और परिवार के अनुसार, जब शनिवार रात अचानक इमारत ताश के पत्तों की तरह ढहने लगी, तो चारों तरफ चीख-पुकार मच गई।
उस अफरा-तफरी के माहौल में पार्वती कैंटीन के अंदर और आस-पास मौजूद छात्रों को सुरक्षित बाहर निकालने में जुट गईं। पार्वती के परिवार के एक सदस्य ने कहा "वह चाहतीं तो अपने बारे में सोचकर वहां से तुरंत भाग सकती थीं, लेकिन वह ऐसी इंसान नहीं थीं। उन्होंने हमेशा दूसरों को खुद से पहले रखा।"
सालों तक अजनबियों को अपने बच्चों की तरह पालने वाली पार्वती उस रात खुद मलबे से जिंदा बाहर नहीं आ सकीं। परिवार का आरोप है कि यदि बचाव दल (Rescuers) समय रहते उन तक पहुंच जाता, तो शायद उनकी जान बचाई जा सकती थी। उनका दावा है कि मलबे के नीचे फंसे लोगों को निकालने के अभियान में देरी हुई।
Read Latest National News in Hindi only on Prabhasakshi
'इमारत गिरने के समय वह छात्रों को बचा रही थीं'
पार्वती की बेटी नीलम बताती हैं कि उनकी माँ वही कर रही थीं जो वह हमेशा करती थीं—दूसरों का ख़्याल रखना। परिवार के लोगों के अनुसार, जब अचानक इमारत गिरी, तो पार्वती कैंटीन के अंदर और आस-पास मौजूद छात्रों की मदद कर रही थीं। उस अफ़रा-तफ़री के माहौल में, उन्होंने कथित तौर पर यह सुनिश्चित करने की कोशिश की कि छात्र सुरक्षित बाहर निकल जाएँ।
जिस महिला ने सालों तक अजनबियों की देखभाल में बिताए, वह उस रात कभी घर नहीं लौट पाई। जहाँ एक तरफ़ परिवार शोक मना रहा है, वहीं वे जवाब भी तलाश रहे हैं। नीलम और पार्वती के साथ काम करने वाले अन्य लोगों का आरोप है कि अगर बचाव दल उन तक जल्दी पहुँच जाता, तो शायद पार्वती की जान बच सकती थी। उनका दावा है कि मलबे के नीचे फँसे लोगों को बाहर निकालने में देरी हुई।
इमारत का मालिक गिरफ़्तार
दिल्ली पुलिस ने सोमवार को इमारत के मालिक को गिरफ़्तार कर लिया; उसकी पहचान 71 वर्षीय करमवीर के रूप में हुई है। इमारत में कोचिंग सेंटर, कैफ़े और दफ़्तर थे, और बताया जा रहा है कि घटना के समय सबसे ऊपरी मंज़िल पर निर्माण कार्य चल रहा था।
गैर-इरादतन हत्या (culpable homicide) सहित कई धाराओं के तहत एक FIR दर्ज की गई है, और जाँचकर्ता यह पता लगा रहे हैं कि क्या इस हादसे में किसी की लापरवाही की कोई भूमिका थी। इस इमारत के गिरने की घटना ने दक्षिण दिल्ली में अवैध निर्माण को लेकर भी एक व्यापक जाँच शुरू कर दी है। दिल्ली नगर निगम (MCD) ने आस-पास की कई ऐसी इमारतों की पहचान की है, जिन पर आरोप है कि वे बिल्डिंग नियमों का उल्लंघन कर रही हैं। उम्मीद है कि निगम साकेत और महरौली जैसे इलाकों में इमारतों को सील करने और खाली करवाने का अभियान शुरू करेगा। अधिकारियों का कहना है कि अनधिकृत ढांचों को नोटिस जारी किए जाएंगे, खासकर उन ढांचों को जिनकी ऊंचाई तय सीमा से ज़्यादा है या जो बिल्डिंग नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं।