By अभिनय आकाश | Oct 14, 2026
बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने नई दिल्ली में ब्रिक्स समिट में शामिल न होने के लिए तारिक रहमान की आलोचना की है और उनके इस फ़ैसले को नासमझ और बांग्लादेश के राष्ट्रीय हितों के ख़िलाफ़ बताया है। उन्होंने सवाल उठाया कि भारत में उनकी मौजूदगी तारिक रहमान को वहां जाने से क्यों रोकेगी, जबकि उनके पिता और बांग्लादेश के पूर्व राष्ट्रपति ज़ियाउर रहमान ने तब दिल्ली की यात्रा की थी जब वह खुद वहां निर्वासित जीवन जी रही थीं। उनकी यह आलोचना ऐसे समय में आई है जब बांग्लादेश के गृह मंत्री सलाहुद्दीन अहमद ने मंगलवार (13 अक्टूबर) को नई दिल्ली में हुई पहली BIMSTEC गृह मंत्रियों की बैठक में हिस्सा नहीं लिया। नई दिल्ली में हुई बैठकों से बांग्लादेश के दो वरिष्ठ नेताओं के नदारद रहने के कारण, भारत के साथ तनावपूर्ण रिश्तों के बीच ढाका के राजनयिक रुख पर नए सिरे से सवाल उठने लगे हैं।
अगस्त 2024 से भारत में रह रहीं शेख हसीना ने दिसंबर 2026 तक बांग्लादेश लौटने का संकल्प लिया है, भले ही उन्हें पता है कि उन्हें गिरफ़्तार किया जा सकता है, जेल हो सकती है या मौत की सज़ा भी मिल सकती है। बांग्लादेश के इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल ने नवंबर 2025 में हसीना को उनकी गैर-मौजूदगी में मौत की सज़ा सुनाई थी। यह सज़ा जुलाई-अगस्त 2024 में विरोध-प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसक कार्रवाई से जुड़े मानवता के खिलाफ अपराधों के लिए दी गई थी, जिसमें हिंसा भड़काना, जानलेवा बल प्रयोग का आदेश देना और हत्याओं को रोकने में नाकाम रहना शामिल था।
हसीना ने पूछा ब मैं भारत में थी तब आपके पिता ने भारत का दौरा किया था, तो आप क्यों नहीं आ सकते? हसीना ने लगभग पांच दशक पुरानी बात याद करते हुए रहमान के उस फ़ैसले के पीछे की वजह पर सवाल उठाया, जिसमें उन्होंने नई दिल्ली में अहम बैठकों में हिस्सा नहीं लिया था। अपने इंटरव्यू में हसीना ने याद किया कि ज़ियाउर रहमान (तारिक़ के पिता और बांग्लादेश के पूर्व राष्ट्रपति) ने 1979 में नई दिल्ली का दौरा किया था। उस समय वह भारत में रह रही थीं, क्योंकि अगस्त 1975 में उनके पिता शेख़ मुजीबुर रहमान और परिवार के कई सदस्यों की हत्या कर दी गई थी। जब उन्होंने 1979 में दिल्ली का दौरा किया, तब मैं दिल्ली में ही रह रही थी। जब उन्होंने 1980 में लंदन की यात्रा की, तब मैं भी लंदन में थी। उन शहरों में मेरी मौजूदगी ने उन्हें वहां जाने से नहीं रोका।