By अभिनय आकाश | Oct 09, 2026
मेघालय हाई कोर्ट ने दो बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों और एग्जीक्यूटिव सदस्यों को आपराधिक अवमानना का नोटिस जारी किया है। यह नोटिस एडवोकेट जनरल अमित कुमार को हटाने की मांग को लेकर न्यायिक कामकाज के बहिष्कार के उस आह्वान पर जारी किया गया है, जिसे कोर्ट ने "पूरी तरह से अस्वीकार्य" बताया है। कोर्ट ने कहा कि इस बहिष्कार से न्याय-प्रशासन में बाधा आई और बागमारा को छोड़कर बाकी जगहों पर अदालतों में मुक़दमेबाज़ों का प्रतिनिधित्व करने वाला कोई नहीं था। चीफ़ जस्टिस रेवती मोहिते डेरे और जस्टिस एच एस थांगखियू की डिवीज़न बेंच ने गुरुवार को इस मामले का स्वतः संज्ञान लिया। बेंच ने शिलांग बार एसोसिएशन और मेघालय हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के सदस्यों से कारण बताने को कहा कि उनके ख़िलाफ़ आपराधिक अवमानना की कार्रवाई क्यों न शुरू की जाए, और उन्हें 13 अक्टूबर को कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया।
कोर्ट ने यह भी चेतावनी दी कि अगर वकीलों ने तुरंत न्यायिक कामकाज शुरू नहीं किया, तो दूसरे ज़िला बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों को अवमानना का नोटिस जारी किया जा सकता है। हालांकि, इसमें बागमारा बार एसोसिएशन को शामिल नहीं किया गया, जिसने बहिष्कार का समर्थन करने से इनकार कर दिया था। कोर्ट ने बार काउंसिल ऑफ़ इंडिया को भी प्रतिवादी बनाया और मेघालय बार काउंसिल के चेयरमैन को 13 अक्टूबर को व्यक्तिगत रूप से पेश होने और काम से दूर रहने वाले वकीलों के खिलाफ की गई कार्रवाई के बारे में कोर्ट को जानकारी देने का निर्देश दिया। पूरी कार्यवाही इस बात पर केंद्रित है कि बहिष्कार से अदालतों के कामकाज और कानूनी प्रतिनिधित्व तक पहुंच पर असर पड़ा।