Uddhav Thackeray ने चुनाव आयोग को भंग करने की मांग की, Shinde गुट ने Shiv Sena पार्टी फंड पर भी जताया दावा

By नीरज कुमार दुबे | Feb 20, 2023

महाराष्ट्र में सत्ता और अपने पिता बाला साहेब ठाकरे द्वारा स्थापित पार्टी को खो देने वाले उद्धव ठाकरे के हाथ से अब विधान भवन स्थित शिवसेना कार्यालय भी चला गया है। उद्धव ठाकरे को अब ममता बनर्जी, शरद पवार और नीतीश कुमार जैसे नेता ढाढस बंधाने के लिए फोन कर रहे हैं। लेकिन उद्धव को ध्यान रखना होगा कि यह सभी नेता पहले अपना स्वार्थ देखने और मौका लगते ही पाला बदलने में भी माहिर हैं। हालांकि उद्धव ठाकरे एक बात तो सही कह रहे हैं कि जो उनके साथ हुआ वह किसी और के साथ भी हो सकता है। इसीलिए उद्धव ठाकरे की इस सलाह पर गौर करते हुए परिवार आधारित राजनीतिक दलों के मुखियाओं को ध्यान रखना चाहिए कि नेताओं और कार्यकर्ताओं की बात सुनते रहें और उनकी नाराजगी दूर करते रहे।


बहरहाल, जहां तक शिवसेना और पार्टी का चुनाव चिह्न पूरी तरह हाथ से छिन जाने के बाद की स्थिति की बात है तो आपको बता दें कि उद्धव ठाकरे ने सोमवार को अपनी पार्टी की आगे की रणनीति तय करने के लिए अपने करीबी सहयोगियों के साथ शिवसेना भवन में बैठक की। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के नेता संजय राउत, सुभाष देसाई, अनिल देसाई और अनिल परब ने उद्धव ठाकरे के साथ बैठक में भाग लिया। उद्धव ठाकरे ने अनेक जिलास्तरीय नेताओं को भी आगे की रणनीति पर विचार-विमर्श करने के लिए बुलाया है।

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हम आपको याद दिला दें कि निर्वाचन आयोग ने शुक्रवार को एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाले धड़े को असली शिवसेना के रूप में मान्यता दी थी और उसे ‘धनुष बाण’ चुनाव चिह्न आवंटित किये जाने का आदेश भी दिया था। इससे उद्धव ठाकरे को बड़ा झटका लगा है क्योंकि उनके पिता बालासाहेब ठाकरे ने 1966 में पार्टी की स्थापना की थी। पार्टी नेताओं के साथ लंबी बैठक के बाद उद्धव ठाकरे ने सारा गुस्सा चुनाव आयोग पर उतारा और कहा कि निर्वाचन आयोग को भंग कर दिया जाना चाहिए। उन्होंने दादर स्थित शिवसेना भवन में संवाददाताओं से कहा, ‘‘हमारी पार्टी का नाम (शिवसेना) और चुनाव चिह्न (धनुष और तीर) चोरी हो गया है, लेकिन 'ठाकरे' नाम चोरी नहीं हो सकता।’’ हम आपको बता दें कि उद्धव ठाकरे के प्रेस को संबोधित करने से पहले उच्चतम न्यायालय ने आज उनके गुट द्वारा किए गए इस मौलिक उल्लेख पर विचार करने से इंकार कर दिया कि निर्वाचन आयोग के फैसले को चुनौती देने वाली उसकी याचिका को तत्काल सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाए। ठाकरे ने कहा, “निर्वाचन आयोग का आदेश गलत है। उच्चतम न्यायालय उम्मीद की आखिरी किरण है।” उन्होंने कहा, ‘‘ऐसा एक भी उदाहरण नहीं है, जब पार्टी का नाम और चुनाव चिह्न सीधे एक गुट को दे दिया गया हो।’’ ठाकरे ने कहा, 'इतनी जल्दबाजी में फैसला देने की क्या जरूरत थी।'


उन्होंने कहा, “भले ही दूसरे गुट ने हमारा नाम और चिह्न ले लिया हो, लेकिन वे हमारा ठाकरे का नाम नहीं ले सकते। मैं भाग्यशाली हूं कि बालासाहेब ठाकरे के परिवार में पैदा हुआ।’’ भाजपा पर लोकतांत्रिक संस्थाओं की मदद से लोकतंत्र को नष्ट करने का आरोप लगाते हुए उद्धव ठाकरे ने कहा, ‘‘भाजपा ने आज हमारे साथ जो किया, वह किसी के साथ भी कर सकती है। अगर ऐसा ही चलता रहा तो 2024 के बाद देश में लोकतंत्र या चुनाव नहीं होगा।’’ उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी, शरद पवार, नीतीश कुमार और कई अन्य नेताओं ने उन्हें फोन किया और उनके प्रति समर्थन व्यक्त किया।


उद्धव ठाकरे ने एक सवाल के जवाब में कहा कि उन्होंने हिंदुत्व को कभी नहीं छोड़ा, हालांकि उन पर ऐसा करने का आरोप तब लगा, जब उन्होंने 2019 में भाजपा के साथ अपने दशकों पुराने गठबंधन को समाप्त कर दिया। ठाकरे ने कहा कि अंधेरी विधानसभा उपचुनाव के दौरान उनकी पार्टी के उम्मीदवार ने निर्वाचन आयोग द्वारा दिए गए नाम का इस्तेमाल किया था। उन्होंने कहा कि दूसरे धड़े में उस उपचुनाव को लड़ने की हिम्मत भी नहीं थी। उनके खेमे द्वारा शिवसेना के आधिकारिक बैंक खातों से धन हस्तांतरित किए जाने की खबरों के बारे में पूछे जाने पर उद्धव ठाकरे ने कहा, “निर्वाचन आयोग को यह बोलने का कोई अधिकार नहीं है कि पार्टी के धन का क्या होता है और यह सुल्तान की तरह कार्य नहीं कर सकता। इसकी भूमिका केवल निष्पक्ष चुनाव कराने और किसी राजनीतिक दल के भीतर आंतरिक लोकतंत्र सुनिश्चित करने तक सीमित है।” उन्होंने कहा कि अगर निर्वाचन आयोग पार्टी के कोष वितरण में दखल देता है, तो उस पर आपराधिक मामला चलेगा।


शिंदे खेमे द्वारा शिवसेना की विभिन्न संपत्तियों को अपने कब्जे में लिए जाने के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, “मैं उन्हें मेरे पिता (दिवंगत बालासाहेब ठाकरे) के नाम और उनकी तस्वीर का इस्तेमाल बंद करने की चुनौती देता हूं। वे अपने पिता की तस्वीर लगाएं और फिर वोट मांगें।” उद्धव ठाकरे ने कहा कि आयोग पहले ही उनके खेमे को शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के नाम से अलग नाम दे चुका है और उसे प्रतीक के तौर पर मशाल भी दे चुका है। उन्होंने कहा, "इसका मतलब है कि निर्वाचन आयोग ने हमारे अलग अस्तित्व को पहले ही मान्यता दे दी थी।" उन्होंने कहा कि पार्टी का सिंबल भले चोरी हो गया है लेकिन ठाकरे नाम नहीं चुराया जा सकता। उद्धव ठाकरे ने कहा कि शिव धनुष को रावण कैसे धारण करेगा? हम आपको यह भी बता दें कि महाराष्ट्र विधान भवन स्थित शिवसेना कार्यालय पर भी आज शिंदे गुट का कब्जा हो गया। इसके बाद दोनों धड़ों में जमकर बहसबाजी भी हुई।

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