शिवसेना ने उठाया सवाल, श्रीनगर में राष्ट्रीय ध्वज को फहराने से क्यों रोका गया?

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Oct 28, 2020

मुंबई। शिवसेना ने बुधवार को सवाल किया कि अनुच्छेद-370 के ज्यादातर प्रावधान निरस्त किए जाने के बावजूद श्रीनगर के लाल चौक पर कुछ युवकों को राष्ट्रीय ध्वज फहराने से क्यों रोका गया? शिवसेना ने अपने मुखपत्र ‘सामना’ में प्रकाशित संपादकीय में पूछा कि अनुच्छेद-370 के ज्यादातर प्रावधान निष्प्रभावी करने के बाद जम्मू-कश्मीर में क्या बदलाव आया है? पार्टी ने साथ ही कहा कि ‘हिन्दुत्व का मतलब राष्ट्रवाद है।’’ उल्लेखनीय है खुद को जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा जिले के भाजपा कार्यकर्ता बता रहे तीन युवकों ने सोमवार को श्रीनगर के लाल चौक पर जब तिरंगा फहराने की कोशिश की तो उन्हें हिरासत में ले लिया गया था। शिवसेना के मुखपत्र ने अभिनेत्री कंगना रनौत का नाम लिए बिना लिखा, ‘‘नकली मर्दानी जिसने मुंबई को पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर कहा, उसको केंद्र सरकार द्वारा सुरक्षा मुहैया कराई गई जबकि जो युवक कश्मीर में तिरंगा फहरा रहे थे, उन्हें पुलिस अपने साथ ले गई।’’ 

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सामना ने लिखा, ‘‘देश जानना चाहता है कि युवा क्यों लाल चौक पर तिरंगा नहीं फहरा सकते हैं? इसका मतलब है कि कश्मीर में हालात नहीं सुधरे हैं।’’ संपादकीय में कहा गया कि मुंबई में तिरंगा फहराया जाता है, इसका मतलब है कि यह ‘पाकिस्तान नहीं है।’’ साथ ही लिखा, ‘‘तिरंगे का अपमान वहां होता है जहां पर पाकिस्तानी हस्तक्षेप है।’’ सामना ने कंगना का नाम लिए बिना कहा कि कश्मीर में तिरंगा नहीं फहराने देने पर अभिनेत्री को अपनी नाराजगी जाहिर करनी चाहिए। उल्लेखनीया है कि कंगना ने मुंबई की तुलना पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर से की थी जिसको लेकर विवाद उत्पन्न हो गया था। संपादकीय में दावा किया कि जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला ने केंद्र शासित प्रदेश में अनुच्छेद-370 को बहाल करने के लिए चीन की मदद लेने की बात कही थी। ‘सामना’ ने राष्ट्रीय ध्वज को लेकर पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती के बयान की भी निंदा की। मुखपत्र ने कहा, ‘‘यह देशद्रोह है।’’ उल्लेखनीय है कि नेशनल कांफ्रेस ने सोमवार को कहा था कि पार्टी अध्यक्ष ने ऐसी कोई टिप्पणी नहीं की है। शिवसेना ने दावा किया कि अनुच्छेद-370 के ज्यादातर प्रावधान निरस्त किए जाने के करीब एक साल बाद भी कश्मीर में एक रुपये का निवेश नहीं आया और बेरोजगार युवक एक बार फिर हथियार उठा रहे हैं और स्थानीय नेता उन्हें भ्रमित कर रहे हैं।

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