शिवसेना vs राज्यपाल, कभी सेक्युलरिज्म के मुद्दे पर भिड़े तो कभी विधान परिषद सदस्यता को लेकर हुई तकरार

By अभिनय आकाश | Feb 13, 2021

महाराष्ट्र में शिवसेना और राज्यपाल के बीच लगातार खींचतान चल रही है। राज्य में ऐसे कई मौके आए जब प्रदेश में राज्यपाल बनाम सरकार की जंग नजर आई। शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना के जरिये राज्यपाल पर एक बार फिर निशाना साधा है। शिवसेना ने सामना में लिखा है कि जब से भगत सिंह कोश्यारी महाराष्ट्र के राज्यपाल बने हैं वह हमेशा से खबरों में रहे हैं। इसके साथ ही शिवसेना ने ताजा विमान प्रकरण का जिक्र करते हुए लिखा कि राज्यपाल सरकारी विमान से देहरादून जाना चाहते थे। लेकिन सरकार ने अनुमति देने से मना कर दिया। शिवसेना ने कहा विपक्षी भाजपा इसे मुद्दा बना रही है। उसने पूछा कि जब सरकार ने विमान को उड़ने की मंजूरी नहीं दी थी तो वह विमान में बैठे ही क्यों। संपादकीय में कहा गया कि यह राज्यपाल का निजी दौरा था और कानून के मुताबिक केवल राज्यपाल ही नहीं बल्कि मुख्यमंत्री भी इस तरह के उद्देश्यों के लिए सरकारी विमान का इस्तेमाल नहीं कर सकते हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय ने कानून के मुताबिक काम किया।

वैसे ये कोई पहला मामला नहीं है जब सूबे में राज्यपाल बनाम सरकार की जंग देखने को मिली है। इससे पहले मंदिर खोलने के मुद्दे पर भी दोनों में तल्खी देखने को मिली थी। सरकार और राज्यपाल दोनों ने एक दूसरे को पत्र लिखकर तीखा हमला भी बोला था। राज्यपाल कोश्यारी ने लिखा था कि मुझे आश्चर्य होता है कि धर्मस्थलों को फिर से खोलना स्थगित करने के लिए क्या आपको दैवीय चेतावनी मिल रही या आप अचानक सेक्युलर हो गए हो। जिसका जवाब देते हुए उद्धव ठाकरे ने लिखा कि क्या सेक्युलरिज्म संविधान का मुख्य तत्व नहीं है जिसकी आपने राज्य का राज्यपाल बनते वक्त शपथ ली थी। मुझे हिंदुत्व पर किसी से सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं। इसके बाद तो शिवसेना सांसद संजय राउत एक कदम आगे निकलते हुए सामना में संवैधानिक पद पर विराजमान व्यक्ति को प्रसव पीड़ा होने जैसी बात लिख दी थी। 

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विधान परिषद सदस्यता पर जंग

28 मई को उद्धव ठाकरे को मुख्यमंत्री बने छह महीने पूरे होने वाले थे, लेकिन अभी तक वो महाराष्ट्र के दोनों सदनों में से किसी के सदस्य नहीं बन पाये। जिसकी वजह से उद्धव ठाकरे के कुर्सी पर बने रहने को लेकर असमंजस का दौर भी शुरू हो गया। महाराष्ट्र कैबिनेट ने उद्धव ठाकरे को विधान परिषद का सदस्य मनोनीत करने के लिए राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी को दोबारा प्रस्ताव पारित कर भेजा लेकिन राज्यपाल के फैसले पर असमंजस की स्थिति कायम थी। इधर शिवसेना का राज्यपाल को लेकर हमले का दौर भी चल रहा था। लेकिन मामला बनता नहीं देख आखिर उद्धव ठाकरे को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को फोन करना पड़ा था। खबरों के अनुसार 28 अप्रैल को फोन पर उद्धव ठाकरे ने महाराष्ट्र की संवैधानिक स्थिति को लेकर वस्तुस्थिति से अवगत कराया था।  

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