कमलनाथ सरकार के फैसले को बदलेगी शिवराज सरकार, महापौर और अध्यक्ष को सीधे चुनेंगी जनता

By दिनेश शुक्ल | May 30, 2020

भोपाल। मध्य प्रदेश की शिवराज सरकार नगरीय निकाय चुनाव में संशोधन करने जा रही है। प्रदेश में 15 महिनें रही कांग्रेस की कमलनाथ सरकार ने नगर पालिक अधिनियम में संशोधन किया था। जिसमें नगर निगमों में महापौर और नगर पालिकाओं में अध्यक्ष का चुनाव पार्षदों द्वारा किए जाने को लेकर संशोधन किए गए थे। लेकिन अब शिवराज सरकार इसी फैसले को बदलने जा रही है। कांग्रेस की कमलनाथ सरकार ने  महापौर और अध्यक्षों का चुनाव अप्रत्यक्ष प्रणाली से कराने का निर्णय लिया था। भाजपा की शिवराज सरकार अब इसके लिए मध्यप्रदेश नगर पालिका विधि (संशोधन) अधिनियम 2019 में संशोधन करने का सैद्धांतिक फैसला कर चुकी है। इसके तहत महापौर और अध्यक्ष का चुनाव सीधे जनता (मतदाता) करेंगी। नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने प्रस्ताव तैयार करके मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को भेज दिया है। 

 

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कांग्रेस की कमलनाथ सरकार ने सितंबर 2019 में नगर पालिक विधि अधि‍नियम में संशोधन करके नगर निगम के महापौर और नगर पालिक व नगर परिषद के अध्यक्ष का चुनाव अप्रत्यक्ष प्रणाली से कराने का निर्णय लिया था। इसके तहत चुने हुए पार्षद महापौर और अध्यक्ष का चुनाव करते। पहले अध्यादेश और फिर विधानसभा में दिसंबर 2019 में विधेयक के जरिए नए प्रावधानों को लागू किया गया। जिसका विपक्ष में रहते भाजपा ने काफी विरोध किया था। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, पूर्व नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव, डॉ. नरोत्तम मिश्रा सहित अन्य वरिष्ठ नेताओं ने तब राज्यपाल लालजी टंडन से मुलाकात कर अनुरोध किया था कि इस निर्णय को मंजूरी न दें। जिसके बाद कुछ दिन मामला अटका भी रहा। लेकिन तत्कालीन मुख्यमंत्री कमल नाथ के राज्यपाल से मुलाकात करने के बाद उन्होंने इसकी अनुमति दी थी। नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने अधिनियम में संशोधन के हिसाब से नियमों में भी बदलाव कर दिया था।

 

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वही राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद से ही यह संभावना जताई जा रही थी कि नगरीय निकाय चुनाव की पुरानी व्यवस्था को फिर लागू किया जाएगा। राजनीतिक स्तर पर सैद्धांतिक निर्णय होने के बाद नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने शुक्रवार को अधिनियम में संशोधन का प्रस्ताव मुख्यमंत्री को भेज दिया। बताया जा रहा है कि आगामी नगरीय निकाय के चुनाव नए प्रावधानों से ही कराए जाएंगे। विभागीय सूत्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री के अनुमोदन से इसे वरिष्ठ सचिव समिति बैठक नए प्रावधानों पर विचार करके विभाग के माध्यम से कैबिनेट निर्णय के लिए प्रस्तुत किया जाएगा। सरकार के निर्णय के बाद चूंकि अभी विधानसभा का सत्र नहीं चल रहा है, इसलिए संशोधन के लिए अध्यादेश लाया जा सकता है। इसे विधानसभा के मानसून सत्र में विधेयक के तौर पर प्रस्तुत करके अधिनियम में संशोधन पारित कराकर राज्यपाल की अनुमति के लिए भेज दिया जाएगा।

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