Prajatantra: यू ही नहीं पेशाब घटना के पीड़ित के शिवराज ने धोए पैर, चुनावी गणित से है इसका कनेक्शन

By अंकित सिंह | Jul 06, 2023

मध्य प्रदेश के सीधी जिले का एक वीडियो हाल में ही वायरल हो रहा था। इस वीडियो में एक व्यक्ति पर दूसरे व्यक्ति पेशाब करते हुए दिख रहा है। वीडियो वायरल हुई तब जाकर सरकार से लेकर प्रशासन तक हरकत में आई। जो जानकारी निकलकर सामने आई उसके मुताबिक पीड़ित व्यक्ति आदिवासी समाज से आता है। उसका नाम दशमत रावत है जबकि पेशाब करने वाले व्यक्ति का नाम प्रवेश शुक्ला है। इस वीडियो के सामने आने के बाद प्रदेश की राजनीति भी तेज हो गई। मामला आदिवासी समाज से जुड़ा था इसलिए कांग्रेस सहित तमाम विपक्षी दल राज्य की भाजपा सरकार पर हमलावर हो गए। आनन-फानन में सरकार ने भी आरोपी शुक्ला के खिलाफ कार्रवाई करते हुए एनएसए लगा दिया। उसके घर पर बुलडोजर तक चला दिया।

कांग्रेस पूरे मामले पर है हमलावर

इस मामले को लेकर कांग्रेस पूरी तरीके से प्रदेश की भाजपा सरकार पर हमलावर है कांग्रेस का दावा है कि आरोपी युवक भाजपा का सदस्य है। मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने कहा कि मध्य प्रदेश में आदिवासी समाज सबसे अधिक है और उनके ये हालात हैं। केवल 10% ऐसी घटनाएं उजागर होती है, यह तो एक घटना है, ऐसी कई घटना सामने आती है। आदिवासी समाज कभी नहीं माफ करेगा। उन्हें(CM शिवराज सिंह चौहान) सिर्फ कैमरा से मतलब था। उन्होंने कहा कि आदिवासियों पर अत्याचार के मामले में मध्य प्रदेश पहले से ही पहले स्थान पर है। कमलनाथ ने कहा कि इस घटना ने पूरे मध्य प्रदेश को शर्मसार कर दिया है। बसपा अध्यक्ष मायावती ने भी घटना की कड़ी निंदा करते हुए आरोपी की संपत्ति को जब्त या ध्वस्त किए जाने मांग की थी। 

राजनीतिक लाभ उठाने की हो रही कोशिश

एक ओर जहां मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पूरे मामले को लेकर डैमेज कंट्रोल की कोशिश की तो वही कांग्रेस इसे बड़ा मुद्दा बनाने की कोशिश कर रही है। इसका सबसे बड़ा कारण आदिवासी वोट है। मध्य प्रदेश में सबसे ज्यादा आदिवासी वोट है। ना सिर्फ इसका राज्य की राजनीति बल्कि राष्ट्रीय राजनीति पर भी इसका असर रहता है। भाजपा लगातार इस बार आदिवासियों को अपने पक्ष में करने की कोशिश कर रही है। भाजपा की ओर से तरह-तरह की योजनाएं बनाई गई है। मध्य प्रदेश में इस साल विधानसभा के चुनाव होने हैं। मध्यप्रदेश में करीब 22 फ़ीसदी मतदाता आदिवासी समाज से आते हैं। राज्य में कुल 230 विधानसभा की सीटें हैं जिनमें से 47 सीटें अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित है। वहीं, 90 सीट ऐसे हैं जहां आदिवासी मतदाता निर्णायक भूमिका निभाते हैं। 

2018 में भाजपा को लगा था झटका

2018 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को जबरदस्त झटका लगा था। कांग्रेस ने 47 रिजर्व सीटों में से 30 पर जीत हासिल की थी जबकि भाजपा सिर्फ 16 सीट ही जीत पाई थी। आदिवासी बहुल सीटों पर जीत की वजह से कांग्रेस 114 का आंकड़ा छूकर सरकार बनाने में कामयाब हुई थी। वहीं 2013 के विधानसभा चुनाव में परिस्थितियां बिल्कुल इसके उलट थी। तब भाजपा के खाते में इन 47 सीटों में से 31 सीटें थी। 

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भाजपा का फोकस

जब 2020 में शिवराज सिंह चौहान एक बार फिर से राज्य के मुख्यमंत्री बने तो उन्होंने आदिवासी मतदाताओं पर अपना पूरा फोकस कर दिया। आदिवासी मतदाताओं को साधने के लिए अलग-अलग प्रोग्राम बनाएं। आदिवासी वोट बैंक को साधने के लिए बिरसा मुंडा और टंट्या मामा जैसे विभूतियों का सम्मान किया गया। उनके जन्मदिन के अवसर पर बड़े आयोजन भी हुए। इसके अलावा भोपाल की हबीबगंज रेलवे स्टेशन का नाम रानी कमलापति किया गया। इतना ही नहीं, आदिवासी और जनजातीय समूह को मजबूत करने के लिए राज्य में शिवराज सिंह चौहान ने पेसा एक्ट को लागू किया। हाल में ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शहडोल का दौरा किया था। उन्होंने आदिवासियों के साथ खाट पर चर्चा की। इस दौरान वह लोगों से मिले। उन्होंने ऐलान किया कि रानी दुर्गावती की 500वीं जन्म शताब्दी को पूरे देश में मनाया जाएगा। 

कांग्रेस भी किसी भी कीमत पर आदिवासी वोट बैंक से अपने पकड़ को ठीला नहीं करना चाहती है। यही कारण है कि इस पूरे मामले को लेकर मध्य प्रदेश की राजनीति गर्म है। इस साल होने वाले चुनाव में भाजपा और कांग्रेस के बीच मुख्य मुकाबला रहने वाला है। भले ही इस मुद्दे को लेकर सरकार एक्शन में है। लेकिन राजनीति लगातार होती रहेगी। देखना दिलचस्प होगा कि आगे आने वाले दिनों में इस मुद्दे को लेकर किस तरह की राजनीति होती है। हालांकि, मतदाता मतदान के पहले नेताओं के वादे और इरादों का मोलभाव करने के बाद ही अपना फैसला लेंगे। यही तो प्रजातंत्र है। 

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