By नीरज कुमार दुबे | Sep 12, 2024
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार रात देश के प्रधान न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड के घर जाकर गणपति पूजन में हिस्सा लिया तो इस पर राजनीति भी शुरू हो गयी। शिवसेना (यूबीटी) के नेता संजय राउत ने इस मामले में जो बयान दिया है वह मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की निष्पक्षता पर सवाल उठाने जैसा है। राउत ने अपने बयानों के माध्यम से, महाराष्ट्र में चल रहे मामले में निष्पक्ष निर्णय देने की मुख्य न्यायाधीश की क्षमता पर संदेह जताने की कोशिश की है। हम आपको बता दें कि शिवसेना (यूबीटी) नेता सुनील प्रभु ने महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर के फैसले को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी है।
राउत के मुताबिक, मुख्य न्यायाधीश को खुद को इस मामले से अलग कर लेना चाहिए क्योंकि केंद्र सरकार के मुखिया के साथ उनके 'संबंध' 'खुले तौर पर सामने' आ रहे हैं। राउत ने यह भी कहा कि पिछले तीन सालों से एक के बाद एक तारीखें दी जा रही हैं और महाराष्ट्र में एक अवैध सरकार चल रही है। उन्होंने राकांपा और शिवसेना जैसी पार्टियों के टूटने की आलोचना की और प्रधानमंत्री पर महाराष्ट्र सरकार को बचाने में दिलचस्पी लेने का आरोप लगाया।
राउत ने मुख्य न्यायाधीश चंद्रचूड़ से खुद को महाराष्ट्र संबंधी मामले से दूर रखने का अपना आह्वान दोहराया। शिवसेना (यूबीटी) नेता ने कहा कि मुझे ऐसा लगता है कि ऐसी परंपरा है कि ऐसे मामलों में अगर कोई पक्ष है और जज का उससे कोई संबंध है या दिखता है तो वह उस मामले से खुद को अलग कर लेता है।' उन्होंने कहा कि इसलिए मुझे लगता है कि चंद्रचूड़ साहब को इससे (असली शिव-सेना मामले) खुद को अलग कर लेना चाहिए। दूसरी ओर, संजय राउत के बयान पर टिप्पणी करते हुए महाराष्ट्र भाजपा नेता और पार्टी विधायक राम कदम ने कहा है कि गणपति पूजन में भी राजनीति देखना शिवसेना यूबीटी की विकृत मानसिकता का परिचायक है।