लद्दाख को चीन का हिस्सा दिखाने का मामला, संसदीय समिति ने ट्विटर को लगाई फटकार

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Oct 28, 2020

नयी दिल्ली। लद्दाख को चीन के भूभाग के तौर पर दिखाने के संबंध में संसदीय समिति ने बुधवार को ट्विटर को फटकार लगाते हुए कहा कि यह राजद्रोह की तरह है और अमेरिकी सोशल मीडिया कंपनी को हलफनामे के रूप में इस बारे में स्पष्टीकरण देना होगा। समिति के सूत्रों ने इस बारे में बताया। सूत्रों के मुातबिक भाजपा सांसद मीनाक्षी लेखी की अध्यक्षता वाली डाटा सुरक्षा विधेयक पर संसद की संयुक्त समिति के सामने ट्विटर इंडिया के प्रतिनिधियों ने ‘‘माफी मांगी’’ लेकिन सदस्यों ने उनसे कहा कि यह आपराधिक कृत्य की तरह है क्योंकि इससे देश की संप्रभुता पर सवाल किया गया। इसलिए ‘विपणन शाखा’ ट्विटर इंडिया को नहीं बल्कि ट्विटर इंक को हलफनामा देना होगा। ट्विटर ऐप पर लद्दाख को चीन के भाग के तौर पर दिखाए जाने को लेकर समिति के सदस्यों ने उनसे दो घंटे से ज्यादा समय तक पूछताछ की। लेखी ने कहा, ‘‘समिति की सर्वसम्मत राय है कि लद्दाख को चीन के भूभाग के तौर पर दिखाने के संबंध में ट्विटर का स्पष्टीकरण पर्याप्त नहीं है।’’ हालांकि उन्होंने कहा कि ट्विटर के प्रतिनिधियों ने समिति को बताया कि सोशल मीडिया कंपनी भारत की भावनाओं का सम्मान करती है। लेखी ने कहा, ‘‘यह केवल संवेदनशीलता का मामला नहीं है, यह भारत की संप्रभुता और अखंडता का मामला है, लद्दाख को चीनी भाग के तौर पर दिखाना आपराधिक कृत्य के समान है जिसके लिए सात जेल की सजा का प्रावधान है।’’ 

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लेखी ने कहा कि ट्विटर से उसकी पाबंदी लगाने वाली नीति के बारे में भी पूछा गया। उन्होंने कहा, ‘‘पाबंदी लगाने की नीति को लेकर कोई स्पष्टता नहीं है...इस तरह की कार्रवाई काफी विषय परक हैं...वह खुद सर्वेसर्वा बना हुआ है, ऐसी परिस्थिति में वे अभिव्यक्ति की आजादी को लेकर संविधान के अनुच्छेद 19 का उल्लंघन कर रहे हैं।’’ सूत्रों ने बताया कि कुछ सदस्यों ने ट्विटर की पारदर्शिता नीति और चुनावों के दौरान कार्रवाई, खासकर अन्य देशों में उसकी नीतियों को लेकर सवाल पूछे। प्रतिक्रिया के लिए पूछे जाने पर ट्विटर के एक प्रवक्ता ने ई-मेल से भेजे जवाब में कहा, ‘‘जियोटैगिंग के हालिया मुद्दे को हमारी टीम ने तुरंत सुलझा लिया। हम अपने कार्य के इर्द-गिर्द खुलेपन, पारदर्शिता के लिए प्रतिबद्ध हैं और समय-समय पर अद्यतन जानकारी साझा करने के लिए सरकार के साथ नियमित संपर्क में रहेंगे। ’’ समिति के विभिन्न सूत्रों ने बताया कि अपने ऐप पर लद्दाख को चीन के भूभाग के तौर पर दिखाने के लिए ट्विटर के अधिकारियों ने ‘‘माफी मांगी’’ लेकिन सदस्यों ने उनसे कहा कि वे जो भी कहना चाहते हैं उन्हें सोशल मीडिया की मूल कंपनी ट्विटर इंक को एक हलफनामे में लिखकर देना होगा। उन्होंने कहा कि अमेरिकी कंपनी ट्विटर इंक की ट्विटर इंडिया महज ‘‘विपणन शाखा’’ है इसलिए मूल कंपनी को ही जवाब देना चाहिए। इलेक्ट्रॉनिक्स, सूचना और प्रौद्योगिकी मंत्रालय तथा कानून एवं न्याय मंत्रालय के अधिकारी भी समिति के सामने उपस्थित हुए। भारत सरकार ने 22 अक्टूबर को ट्विटर को उसके लोकेशन सेटिंग के बारे में चेताया था जिसमें लेह को चीन में दिखाया गया था। केंद्र ने कहा था कि देश की संप्रभुता और अखंडता के प्रति अनादर को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सूत्रों ने बताया था कि इलेक्ट्रॉनिक्स, सूचना और प्रौद्योगिकी मंत्रालय में सचिव अजय स्वाहने ने कड़े शब्दों वाले पत्र में ट्विटर के सीईओ जैक डोरसे को देश की भावना का सम्मान करने को कहा है। हाल में ट्विटर की तीखी आलोचना हुई थी, जब केंद्र शासित क्षेत्र लेह में एक युद्ध स्मारक से सीधे प्रसारण के दौरान उसने अपने जियो टैगिंग फीचर में लद्दाख का लोकेशन ‘‘जम्मू कश्मीर, पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना ’’ के तौर परदिखाया था। ट्विटर ने इसे तकनीकी गड़बड़ी बताया जिसे जल्द ठीक कर लिया गया।

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