Prabhasakshi NewsRoom: Shrikant Purohit को मिला प्रमोशन, कर्नल से बने ब्रिगेडियर, साजिशकर्ताओं को लगा बड़ा झटका

By नीरज कुमार दुबे | Apr 11, 2026

भारतीय सेना ने एक ऐतिहासिक और साहसिक निर्णय लेते हुए कर्नल श्रीकांत पुरोहित को ब्रिगेडियर के पद पर पदोन्नत कर दिया है, जिससे न केवल वर्षों से लंबित न्याय को नई दिशा मिली है बल्कि एक ईमानदार अधिकारी की प्रतिष्ठा भी पूरी तरह बहाल हुई है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब हाल ही में सशस्त्र बल न्यायाधिकरण ने उनकी सेवानिवृत्ति पर रोक लगा दी थी और अब सेना ने तेजी दिखाते हुए उन्हें वह सम्मान दिया है जिसके वे लंबे समय से हकदार थे।

हम आपको बता दें कि हाल ही में सशस्त्र बल न्यायाधिकरण ने उनकी सेवानिवृत्ति पर रोक लगा दी थी। उनकी सेवानिवृत्ति 31 मार्च 2026 को होनी थी, लेकिन न्यायाधिकरण ने स्पष्ट कहा कि जब तक उनकी पदोन्नति से जुड़ी शिकायत पर फैसला नहीं हो जाता, तब तक उन्हें सेवा से अलग नहीं किया जा सकता। यह आदेश सोलह मार्च को दिया गया था और अब सेना ने न केवल इस निर्देश का सम्मान किया बल्कि उससे भी आगे जाकर पुरोहित को ब्रिगेडियर बना दिया।

इस पदोन्नति के साथ ही उनकी सेवा अवधि अपने आप बढ़कर 31 मार्च 2028 तक हो गई है। हम आपको बता दें कि ब्रिगेडियर का सेवानिवृत्ति आयु छप्पन वर्ष होती है, जबकि कर्नल की 54 वर्ष। इसका सीधा मतलब है कि अब पुरोहित को दो साल और देश सेवा का अवसर मिलेगा।

हम आपको बता दें कि पुरोहित का मामला साधारण नहीं था। 2008 के मालेगांव विस्फोट मामले में उनकी गिरफ्तारी हुई, उन्होंने करीब नौ साल जेल में बिताए और फिर उच्चतम न्यायालय से जमानत मिली। इसके बाद भी मुकदमा चलता रहा और आखिरकार जुलाई 2025 में विशेष अदालत ने उन्हें सबूतों के अभाव में पूरी तरह बरी कर दिया। यह फैसला केवल कानूनी राहत नहीं था, बल्कि उनके पूरे जीवन और कॅरियर को वापस पटरी पर लाने वाला मोड़ था।

सेना में उनकी सेवा रिकॉर्ड पर नजर डालें तो तस्वीर और भी साफ हो जाती है। बीस साल से अधिक का बेदाग कॅरियर, आतंकवाद विरोधी अभियानों में सक्रिय भूमिका और उत्कृष्ट सेवा मूल्यांकन रिपोर्ट। इसके बावजूद उनकी पदोन्नति इसलिए रुक गई क्योंकि वह एक लंबी कानूनी प्रक्रिया में फंसे रहे। यह स्पष्ट अन्याय था और पुरोहित ने इसे चुनौती दी। उन्होंने कहा कि उनके जूनियर अधिकारी ब्रिगेडियर बन गए जबकि उनका कॅरियर ठहर गया। आखिरकार उनकी आवाज सुनी गई।

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि पुरोहित उन गिने चुने अधिकारियों में शामिल हो गए हैं जिन्हें बिना कर्नल स्तर पर यूनिट कमांड किए सीधे ब्रिगेडियर बनाया गया है। सेना के इतिहास में इससे पहले यह उपलब्धि केवल महान सैन्य अधिकारी और पूर्व सेनाध्यक्ष सैम मानेकशा को मिली थी। यह तुलना अपने आप में बताती है कि पुरोहित का मामला कितना असाधारण है।

यह निर्णय केवल एक व्यक्ति के सम्मान की बहाली नहीं है, बल्कि यह पूरे सिस्टम के लिए एक संदेश है कि अगर कोई निर्दोष है तो देर से ही सही, उसे न्याय जरूर मिलेगा। सेना ने यह दिखा दिया है कि वह अपने अधिकारियों के साथ खड़ी रहती है, खासकर तब जब वह परिस्थितियों के कारण पीछे रह जाते हैं।

पुरोहित का संघर्ष हमें यह भी सिखाता है कि धैर्य और विश्वास कितना जरूरी है। एक अधिकारी जिसने जेल देखी, आरोप झेले, कॅरियर लगभग खत्म होता दिखा, वही आज ब्रिगेडियर बनकर सामने खड़ा है। यह कहानी हर उस व्यक्ति के लिए प्रेरणा है जो मुश्किल हालात में भी हार नहीं मानता।

भारतीय सेना के इस फैसले की जितनी सराहना की जाए कम है। यह कदम केवल पुरोहित के लिए नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का विषय है। यह दिखाता है कि सच्चाई को दबाया नहीं जा सकता और न्याय को रोका नहीं जा सकता। आज पुरोहित की पदोन्नति एक संदेश है कि अगर आप सही हैं, तो अंत में जीत आपकी ही होगी।

बहरहाल, इस फैसले ने यह भी साबित कर दिया है कि भारतीय सेना केवल ताकत का प्रतीक नहीं, बल्कि न्याय और सम्मान की भी सबसे मजबूत संस्था है। पुरोहित को मिला यह सम्मान वास्तव में पूरे देश की जीत है।

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