By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Oct 27, 2026
(गुरदीप सिंह) सिंगापुर, 27 अक्टूबर केंद्रीय ऊर्जा राज्य मंत्री श्रीपद येसो नाइक ने विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के लिए भारत के व्यावहारिक दृष्टिकोण को सामने रखते हुए कहा है कि उभरती अर्थव्यवस्थाओं में औद्योगिकीकरण, रोजगार सृजन और जीवन स्तर में सुधार के लिए ऊर्जा की उपलब्धता जरूरी है। नाइक ने सोमवार को सिंगापुर में एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि बिजली की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए केवल उत्पादन बढ़ाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि बिजली वितरण नेटवर्क को मजबूत करने, वितरण व्यवस्था को कुशल बनाने, ऊर्जा भंडारण और संचालन में लचीलापन लाने की भी जरूरत है। उन्होंने कहा, ‘‘इस वैश्विक परिदृश्य में भारत का अनुभव एक व्यावहारिक दृष्टिकोण पेश करता है।
उन्होंने कहा, ‘‘इसके साथ ही नवीकरणीय ऊर्जा के विस्तार और नयी प्रौद्योगिकियों के विकास से बिजली उत्पादन के स्रोतों में भी बदलाव आ रहा है।’’ नाइक ने पिछले एक दशक में भारत की प्रगति का उल्लेख करते हुए कहा, ‘‘भारत की सौर ऊर्जा उत्पादन क्षमता 55 गुना से अधिक बढ़कर 170 गीगावाट से ज्यादा हो गई है। छतों पर सौर ऊर्जा संयंत्र लगाने की योजना का भी काफी विस्तार हुआ है। इसके तहत 63 लाख से अधिक घरों में सौर ऊर्जा संयंत्र लगाए गए हैं, जिनकी कुल स्थापित क्षमता 18 गीगावाट से अधिक है।’’ उन्होंने बताया कि भारत ने गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों से कुल स्थापित बिजली उत्पादन क्षमता का 50 प्रतिशत हासिल करने का राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (एनडीसी) लक्ष्य तय समय से पांच साल से भी पहले यानी जून 2025 में पूरा कर लिया था।
नाइक ने कहा, ‘‘2035 के लिए एनडीसी में हमारे इस लक्ष्य को बढ़ाकर 60 प्रतिशत कर दिया गया है, जबकि हमारा दीर्घकालिक लक्ष्य 2070 तक शुद्ध शून्य उत्सर्जन हासिल करना है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘इस वृद्धि को बनाए रखने के लिए भारत ऊर्जा भंडारण क्षमता को मजबूत कर रहा है। देश में 2032 तक ऊर्जा भंडारण की जरूरत 400 गीगावाट-घंटे से अधिक होने का अनुमान है। इसके साथ ही बिजली पारेषण, वितरण और डिजिटलीकरण में भी निवेश किया जा रहा है।’’ नाइक ने कहा, ‘‘हमने सुधारों के जरिए परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में अधिक भागीदारी का रास्ता भी खोला है।
इसके साथ ही स्वदेशी क्षमताओं का विकास किया जा रहा है और 2047 तक परमाणु ऊर्जा उत्पादन क्षमता 100 गीगावाट तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।’’ मंत्री ने कहा कि इन प्रयासों का उद्देश्य एक ऐसी मजबूत बिजली व्यवस्था विकसित करना है, जिसमें ऊर्जा के विभिन्न स्रोतों का इस्तेमाल किया जा सके और भारत की बिजली की बढ़ती मांग पूरी हो सके। नाइक ने सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के निवेशकों को आमंत्रित करते हुए कहा, ‘‘हम बड़े पैमाने पर नवीकरणीय ऊर्जा को बिजली ग्रिड से जोड़ने के लिए राष्ट्रीय पारेषण नेटवर्क का विस्तार कर रहे हैं। हरित ऊर्जा गलियारों के विकास में तेजी लाई जा रही है और पुनर्गठित वितरण क्षेत्र योजना (आरडीएसएस) के जरिए बिजली वितरण क्षेत्र को मजबूत किया जा रहा है।
इस योजना से बिजली वितरण कंपनियों की वित्तीय स्थिति सुधारने में मदद मिली है।’’ उन्होंने साझा चुनौतियों से निपटने के लिए देशों के बीच जानकारी के आदान-प्रदान, प्रौद्योगिकी सहयोग, क्षमता निर्माण और निवेश के जरिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने का भी आह्वान किया। सिंगापुर के ऊर्जा बाजार प्राधिकरण (ईएमए) की मेजबानी में पांच दिवसीय शिखर सम्मेलन 27 से 30 अक्टूबर, 2026 तक आयोजित किया जा रहा है।