By रेनू तिवारी | Oct 27, 2026
मतदाता सूची के 'स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन' (SIR) को लेकर भारत निर्वाचन आयोग (ECI) और विपक्ष के बीच जारी तीखे टकराव के बीच एक नया मोड़ देखने को मिला है। मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में इस महत्वपूर्ण मामले की सुनवाई से ठीक पहले, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर एक आध्यात्मिक एवं सांकेतिक पोस्ट साझा की। राहुल गांधी द्वारा साझा की गई तस्वीर में भगवान शिव के मस्तक पर सुशोभित होने वाला त्रिपुंड (तीन आड़ी सफेद रेखाएं और एक खड़ी लाल रेखा) अंकित था, जिसके साथ उन्होंने संस्कृत का सुप्रसिद्ध वाक्यांश "सत्यम् शिवम् सुन्दरम्" लिखा। इस पोस्ट को चुनाव आयोग के खिलाफ जारी उनके अभियान और शीर्ष अदालत में हो रही सुनवाई के संदर्भ में एक गहरे राजनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है।
राहुल गांधी की 'तांडव' वाली टिप्पणी और ECI विवाद
राहुल गांधी की यह सोशल मीडिया पोस्ट कांग्रेस नेता और चुनाव आयोग के बीच बढ़ते तनाव के बीच आई है। उन्होंने बार-बार चुनाव आयोग के कामकाज पर सवाल उठाए हैं और चुनावी प्रक्रिया में गड़बड़ी का आरोप लगाया है, जिसका आयोग ने खंडन किया है।
11 अक्टूबर को, गांधी ने सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकालने की घोषणा की। उन्होंने विपक्षी दलों, नागरिक समाज संगठनों और आम नागरिकों से "वोट चोरी" के कथित मामलों के खिलाफ इस विरोध प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारी भारत के मुख्य न्यायाधीश को एक ज्ञापन सौंपेंगे, जिसमें SIR प्रक्रिया को रोकने और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की जाएगी।
गांधी ने विपक्ष के इस अभियान का वर्णन करने के लिए धार्मिक प्रतीकों का भी इस्तेमाल किया। उन्होंने इस विरोध प्रदर्शन को "तांडव" कहा, जो भगवान शिव के ब्रह्मांडीय नृत्य को दर्शाता है। उन्होंने संकेत दिया कि चुनाव आयोग और मतदाता सूची संशोधन के खिलाफ यह आंदोलन जारी रहेगा।
उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त और SIR प्रक्रिया के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में मामला क्या है? राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और 'इंडिया' (INDIA) गठबंधन के अन्य नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने चुनाव आयोग द्वारा SIR (मतदाता सूची पुनरीक्षण) लागू करने के दौरान अपनी सामूहिक शक्तियों के 'एकतरफा और मनमाने' इस्तेमाल को चुनौती दी है।
याचिका में यह सवाल उठाया गया है कि क्या पुनरीक्षण से जुड़े फैसले अन्य चुनाव आयुक्तों की जानकारी और उनकी मंजूरी से लिए गए थे। इसमें मतदाता पंजीकरण फॉर्म 6 में किए गए बदलावों, चुनावी डेटाबेस के कामकाज और बिना उचित नोटिस दिए मतदाताओं के नाम हटाए जाने को लेकर भी चिंता जताई गई है। साथ ही, यह भी कहा गया है कि हटाए गए नामों को वापस मतदाता सूची में जोड़ने के लिए कोई प्रभावी व्यवस्था नहीं है।
चुनाव आयोग ने एकतरफा फैसले लेने के आरोपों को खारिज कर दिया है। आयोग का कहना है कि SIR से जुड़े आदेश तीनों सदस्यों की सर्वसम्मति से लिए गए थे।
सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही में पुनरीक्षण प्रक्रिया से जुड़ी कानूनी चुनौतियों, और चुनाव आयोग के निर्णय लेने के तरीके तथा मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा को लेकर याचिकाकर्ताओं द्वारा उठाए गए सवालों पर विचार किए जाने की उम्मीद है।
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