श्यामा प्रसाद मुखर्जी वास्तविकता से कम आंके गये विद्वान थे : जितेंद्र सिंह

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Oct 18, 2021

नयी दिल्ली|  केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने रविवार को कहा कि भारतीय जनता पार्टी के विचारक श्यामा प्रसाद मुखर्जी वास्तविकता से कम आंके गये विद्वान थे जिनकी बतौर शिक्षाविद ‘शानदार भूमिका’ को ब्रिटिश शासकों ने स्वीकार की।

इसे भी पढ़ें: असदुद्दीन ओवैसी ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के बयान की आलोचना की

सिंह ने कहा कि जब देश में बहुत कम विश्वविद्यालय थे और उनमें से ज्यादातर ब्रिटिश नियंत्रण में थे और ज्यादातर में ब्रिटिश अध्यापक थे, तब वह महज 34 साल की उम्र में कलकत्ता विश्वविद्यालय के कुलपति बने और उन्होंने देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों में 22 दीक्षांत भाषण दिए।

कार्मिक राज्यमंत्री ने कहा, ‘‘ मुखर्जी वास्तविकता से कम आंके गये विद्वान थे और इतिहास सार्वजनिक जीवन में उनके योगदान के संबंध में उनके साथ न्याय नहीं कर पाया... वहीं अकादमिक विद्वान के तौर पर उनकी शानदार भूमिका को भी समुचित ढंग से स्वीकार नहीं कर उनके साथ नाइंसाफी की गयी जबकि इसे ब्रिटिश शासकों ने स्वीकार कर लिया था। ’’

सिंह ने 1936 में मुखर्जी द्वारा नागपुर विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में दिये गये भाषण का हवाला दिया जहां उन्होंने कहा था, ‘‘ भारत मुख्य तौर पर इसलिए पिछड़ गया क्योंकि उसके लोग अहम घड़ी में विभाजित एवं असंगठित थे...।’’

इसे भी पढ़ें: ‘हिंदुत्व’ को उन लोगों से खतरा है जो इसका इस्तेमाल सत्ता पाने के लिए करते हैं: ठाकरे

मंत्री ने कहा कि अपने राजनीतिक विचार में भी मुखर्जी अकादमिक चिंतन से प्रेरित थे और यह उनके नारे ‘ एक निशान, एक विधान, एक प्रधान ’ में परिलक्षित हुआ और इसके खातिर उन्होंने अपना बलिदान दिया।

प्रमुख खबरें

Mahalakshmi Vrat पर खूबसूरत लुक के लिए ट्राई करें ये 4 Kada Payal Designs

Rahul Gandhi पर CM Yogi का तीखा हमला, हामिद अंसारी के बयान पर भी उठाए सवाल

Asian Games TT: भारतीय महिला टीम ने Singapore को रोमांचक मुकाबले में 3-2 से दी मात

Mahalakshmi Vrat 2026: मां लक्ष्मी का वाहन उल्लू क्यों है, धार्मिक मान्यताओं में छिपा है धन और बुद्धि का संदेश