By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Jan 11, 2026
कर्नाटक के मुख्यमंत्री एस. सिद्धरमैया ने कन्नड़ माध्यम से विद्यालयों में भी मलयालम को अनिवार्य करने के केरल सरकार के कदम का कड़ा विरोध करते हुए शनिवार को कहा कि भाषाई अल्पसंख्यकों पर कोई भी जबरदस्ती नहीं थोपी जा सकती।
मंगलुरु नगर के पास पिलिकुला निसर्ग धाम में संवाददाताओं से अनौपचारिक बातचीत में सिद्धरमैया ने कहा कि यद्यपि एक राज्य की विधायिका कानून पारित कर सकती है, इसे लागू करने में संवैधानिक सुरक्षा और भाषाई विविधता का सम्मान करना आवश्यक है।
उन्होंने कहा, ‘‘केरल सरकार ने एक कानून पारित किया होगा, लेकिन उसे इस तरह से लागू नहीं किया जा सकता। आप भाषाई अल्पसंख्यकों पर एक जबरदस्ती थोप नहीं सकते। यह स्वीकार्य नहीं है कि अन्य मातृ भाषाएं बोलने वाले लोगों के केवल मलयालम सीखने पर जोर दिया जाए।’’
सिद्धरमैया ने चेतावनी दी कि यदि केरल के राज्यपाल प्रस्तावित कानून को सहमति प्रदान करते हैं और यह लागू होता है तो कर्नाटक इस मुद्दे को आगे ले जाने के लिए विवश होग। और ‘‘यदि यह कानून बनता है तो यह स्थिति हमें विरोध प्रदर्शन करने के लिए बाध्य करेगी। केंद्र सरकार और राष्ट्रपति से भी अपील की जाएगी।’’
मुख्यमंत्री ने यह बात रेखांकित की कि भारत का संघीय ढांचा और संवैधानिक रूपरेखा, भाषाई अल्पसंख्यकों की विशेषकर उन सीमावर्ती क्षेत्रों में रक्षा करती है जहां समुदायों ने अपनी और संस्कृति को ऐतिहासिक रूप से संरक्षित रखा है तथा इन सुरक्षा को हल्का करने का कोई भी प्रयास एक खतरनाक मिसाल कायम करेगा।
मुख्यमंत्री की ये टिप्पणियां दक्षिण भारत में, विशेषकर भाषाई सीमाओं से सटे राज्यों में, अधिकारों और शिक्षा नीति पर बढ़ते राजनीतिक ध्यान के बीच आई हैं। अन्य प्रशासनिक मामलों पर किए गए सवालों का जवाब देते हुए सिद्धरमैया ने कहा कि कर्नाटक सरकार उन तीन कानूनों पर स्पष्टीकरण देगी जो वर्तमान में राज्यपाल की सहमति के लिए लंबित हैं। उन्होंने उन विधेयकों का नाम लिए बगैर कहा, ‘‘राज्यपाल ने कुछ स्पष्टीकरण मांगे हैं। सरकार आवश्यक स्पष्टीकरण उपलब्ध कराने की प्रक्रिया में है।