Mysuru Land Scam Case | मैसूर भूमि घोटाले मामले में राज्यपाल की मंजूरी के बाद सिद्धारमैया पर मुकदमा चलाया जाएगा

By रेनू तिवारी | Aug 17, 2024

कर्नाटक के राज्यपाल ने मैसूर शहरी विकास प्राधिकरण (MUDA) से भूमि आवंटन में कथित घोटाले की शिकायत में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया पर मुकदमा चलाने की शनिवार को अनुमति दे दी। राज्यपाल थावर चंद गहलोत ने 'MUDA घोटाले' को उजागर करने वाले RTI कार्यकर्ता टीजे अब्राहम को शनिवार को दोपहर 3 बजे राजभवन में उनसे मिलने का निर्देश दिया है। मुख्यमंत्री पर मुकदमा चलाने के लिए राज्यपाल की अनुमति की आवश्यकता होती है।

2021 में, MUDA ने विकास के लिए मैसूर के केसारे गांव में पार्वती सिद्धारमैया के 3 एकड़ के भूखंड का अधिग्रहण किया। बदले में, उन्हें दक्षिण मैसूर के विजयनगर इलाके में अन्य भूखंड आवंटित किए गए। दावों के अनुसार, विजयनगर भूखंडों का बाजार मूल्य केसर में उनकी मूल भूमि की तुलना में काफी अधिक है। कर्नाटक भ्रष्टाचार विरोधी और पर्यावरण मंच के अध्यक्ष अब्राहम ने एक शिकायत दर्ज कराई है जिसमें आरोप लगाया गया है कि सिद्धारमैया ने अपने 2023 विधानसभा चुनाव हलफनामे में उक्त भूमि पर अपनी पत्नी के स्वामित्व का खुलासा नहीं किया।

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शिकायत में आरोप लगाया गया है कि हलफनामे में भूमि का विवरण शामिल न करना "उनकी पूर्ण जानकारी में और स्पष्ट रूप से कुछ गुप्त उद्देश्यों के साथ" था और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 125 ए और धारा 8 के तहत सिद्धारमैया के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की भी मांग की गई थी। इसमें भारतीय न्याय संहिता के विभिन्न उल्लंघनों का भी हवाला दिया गया था।

राज्यपाल ने 26 जुलाई को मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को कारण बताओ नोटिस जारी कर कथित घोटाले पर उनसे स्पष्टीकरण मांगा था। इससे पहले उन्होंने मुख्य सचिव से भी जानकारी मांगी थी। अगस्त के पहले सप्ताह में अब्राहम ने MUDA के आयुक्त को ज्ञापन देकर मुख्यमंत्री की पत्नी पार्वती को दिए गए मुआवजे के भूखंडों को रद्द करने और वापस लेने की मांग की। उन्होंने उल्लेख किया कि भूमि आवंटन में "विभिन्न चरणों में अवैध हेरफेर और भ्रष्ट कदम उठाए गए थे"।

कार्यकर्ता स्नेहमयी कृष्णा द्वारा सिद्धारमैया के खिलाफ जनप्रतिनिधियों की अदालत में एक निजी आपराधिक शिकायत (पीसीआर) भी दायर की गई थी, जिसमें मुख्यमंत्री पर MUDA की भूमि को अपनी पारिवारिक संपत्ति के रूप में दावा करने के लिए दस्तावेजों को जाली बनाने के लिए सत्ता का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया गया था। इसके लिए अभियोजन के लिए राज्यपाल की अनुमति की भी आवश्यकता होती है।

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