क्या आप वाकिफ हैं जैतून के तेल के इन नुकसानों से

By मिताली जैन | Feb 27, 2019

जैतून के तेल का नाम आते ही दिमाग में सिर्फ और सिर्फ इसके लाभ ही आते हैं। इसे एक स्वास्थ्यवर्धक तेल माना जाता है। इसी कारण आजकल इसका अधिक से अधिक प्रयोग की सलाह दी जाती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि जैतून के तेल से कुछ नुकसान भी होते हैं। इसलिए इसका प्रयोग बेहद सोच−समझकर व सीमित मात्रा में करना चाहिए। तो चलिए जानते हैं जैतून के तेल के कुछ नुकसानों के बारे में−

हो सकती है एलर्जी

जैतून का तेल कई तरह की एलर्जी जैसे डर्मटाइटिस, एक्जिमा और श्वसन एलर्जी हो सकती है। इसलिए जिन लोगों को हमेशा एलर्जी का खतरा रहता है, वह अगर ऑलिव ऑयल को भोजन में शामिल करते हैं तो इससे उन्हें परेशानी हो सकती है। 


स्किन रैशेज की संभावना

ऑयली स्किन के लोगों को इसका प्रयोग नहीं करना चाहिए। दरअसल, अनियंत्रित सीबम स्त्राव के कारण त्वचा तैलीय होती है और जब ऐसी स्किन पर जैतून के तेल का प्रयोग होता है तो इससे स्किन पर जलन, रैशेज व रेडनेस की समस्या पैदा होती है। वैसे ऑयली स्किन के अलावा नवजात शिशु व बेहद छोटे बच्चों पर भी ऑलिव ऑयल का प्रयोग नहीं करना चाहिए।

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सैचुरेटिड फैट संबंधित बीमारी

जैतून का तेल मोनोअनसैचुरेटेड वसा का एक समृद्ध स्रोत है। इस तेल के प्रत्येक चम्मच में लगभग 14 प्रतिशत सैचुरेटिड फैट और 120 कैलोरी होती हैं। जिसके कारण अगर नियमित रूप से अनप्रोसेस्ड ऑलिव ऑयल का सेवन किया जाए तो इससे मोटापा, दिल का दौरा, स्ट्रोक, स्तन कैंसर और पेट के कैंसर जैसी घातक बीमारियों के होने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।

कम करे ब्लड शुगर

ऑलिव ऑयल का सेवन ब्लड शुगर को सामान्य स्तर से भी कम कर सकता है। जैतून का तेल इंसुलिन रेसिसटेंस को बढ़ाता है, जिसके कारण यह रक्त में शर्करा के स्तर को कम करता है। जैतून के तेल का अधिक सेवन हाइपोग्लाइसीमिया, पसीना, कांपना, कमजोरी जैसी समस्याएं पैदा कर सकता है।

पित्त की पथरी का खतरा

जैतून के तेल का यह एक सबसे गंभीर दुष्प्रभाव माना जाता है। आवश्यकता से अधिक ऑलिव ऑयल का सेवन पित्ताशय को अवरूद्ध कर सकता है या फिर पित्त की पथरी की वजह बन सकता है। इसलिए ऑलिव ऑयल का लाभ तभी तक है, जब तक आप इसे सीमित मात्रा में प्रयोग करते हैं।

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हो सकते हैं दस्त

ऑलिव ऑयल में हाई फैट कंटेंट पाया जाता है, जो पाचन विकार पैदा करते हैं। दरअसल, जब जैतून के तेल का अधिक सेवन किया जाता है तो शरीर को इसे पचाने में परेशानी होती है। परिणामस्वरूप, कभी−कभी व्यक्ति को दस्त की शिकायत हो सकती है। 

मिताली जैन

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