Tata Sons में बड़े बदलाव की आहट: Noel Tata के नेतृत्व में नए चेयरमैन की तलाश, Chandrasekaran ने छोड़ी कुर्सी

By Ankit Jaiswal | Aug 14, 2026

टाटा समूह के अगले चेयरमैन की तलाश का रास्ता अब खुल गया है। टाटा संस के मौजूदा चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने फरवरी 2027 में अपना पांच साल का कार्यकाल पूरा होने के बाद दोबारा पद के लिए नाम नहीं देने का फैसला किया है। इसके बाद टाटा ट्रस्ट्स ने उनके फैसले का सम्मान करते हुए नए चेयरमैन के चयन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की तैयारी शुरू कर दी है।

इस पूरी प्रक्रिया में नोएल टाटा का नाम सबसे अहम हो गया है। नोएल टाटा टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन हैं और टाटा संस के बोर्ड में ट्रस्ट्स की ओर से नामित दो निदेशकों में शामिल हैं। गुरुवार को सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट की बैठक भी नोएल टाटा की अध्यक्षता में हुई। करीब दो घंटे चली इस बैठक में ट्रस्ट के बाकी पांच न्यासी भी शामिल हुए।

बैठक में सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट ने जल्द से जल्द चयन समिति बनाने की प्रक्रिया शुरू करने का प्रस्ताव पारित किया। यह समिति टाटा संस के नए चेयरमैन के नाम की सिफारिश करेगी। गौरतलब है कि सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट के पास टाटा संस में 27.9 प्रतिशत हिस्सेदारी है और यह कंपनी का सबसे बड़ा शेयरधारक है।

हालांकि, नए चेयरमैन की नियुक्ति की प्रक्रिया के सामने एक अहम कानूनी अड़चन भी है। सर रतन टाटा ट्रस्ट के पास टाटा संस में 23.5 प्रतिशत हिस्सेदारी है, लेकिन महाराष्ट्र के सार्वजनिक न्यास नियामक की ओर से लगाए गए रोक आदेश के कारण फिलहाल इस ट्रस्ट की बैठक नहीं हो पा रही है। इसके चलते चयन प्रक्रिया पूरी तरह आगे नहीं बढ़ सकती है।

प्रस्तावित समिति में तीन सदस्यों का चयन दोनों ट्रस्ट मिलकर करेंगे। जरूरी नहीं कि ये सदस्य टाटा संस के बोर्ड में ट्रस्टों के नामित निदेशक ही हों। बाकी दो सदस्यों का चयन टाटा संस का बोर्ड करेगा। इनमें एक मौजूदा बोर्ड सदस्य और एक स्वतंत्र बाहरी व्यक्ति शामिल होगा।

मौजूदा स्थिति में समस्या यह है कि समिति की बैठक के लिए दोनों ट्रस्टों के नामित सदस्यों की पर्याप्त मौजूदगी जरूरी है। ऐसे में सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट ने प्रक्रिया शुरू तो कर दी है, लेकिन सर रतन टाटा ट्रस्ट पर लगी रोक हटे बिना अगला कदम मुश्किल हो सकता है। जानकारी के मुताबिक, सर रतन टाटा ट्रस्ट ने महाराष्ट्र के चैरिटी आयुक्त से रोक हटाने का अनुरोध किया है और अब उसके जवाब का इंतजार है।

बता दें कि एन. चंद्रशेखरन ने 12 अगस्त को नोएल टाटा और टाटा संस के उपाध्यक्ष वेंु श्रीनिवासन को ईमेल के जरिए अपने फैसले की जानकारी दी थी। टाटा ट्रस्ट्स के मुताबिक, उन्होंने बताया कि 20 फरवरी 2027 को मौजूदा कार्यकाल समाप्त होने के बाद वह चेयरमैन पद के लिए दोबारा नियुक्ति की पेशकश नहीं करेंगे।

चंद्रशेखरन करीब चार दशक से टाटा समूह से जुड़े रहे हैं और उनके नेतृत्व में समूह ने कई बड़े बदलाव देखे हैं। हालांकि, पिछले कुछ समय से चंद्रशेखरन और नोएल टाटा के बीच कारोबारी नीतियों को लेकर मतभेद की खबरें भी सामने आती रही हैं। इन्हीं मतभेदों को उनके पद छोड़ने के फैसले के बैकग्राउंड से जोड़कर देखा जा रहा है।

गौरतलब है कि चंद्रशेखरन ने 2017 में टाटा संस की कमान संभाली थी। उनसे पहले साइरस मिस्त्री चेयरमैन थे, जिन्हें 2016 में पद से हटाया गया था। उस समय नए चेयरमैन की तलाश के लिए पांच सदस्यों वाली समिति बनाई गई थी। इसमें रतन टाटा, वेंनु श्रीनिवासन, अमित चंद्रा, रोनेन सेन और प्रोफेसर कुमार भट्टाचार्य शामिल थे। इसी समिति ने चंद्रशेखरन को अगला चेयरमैन चुना था।

अब करीब एक दशक बाद टाटा समूह में फिर नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया शुरू हो रही है। टाटा ट्रस्ट्स ने कहा है कि उसका लक्ष्य नेतृत्व का बदलाव समय पर, व्यवस्थित और सुचारू तरीके से पूरा करना है। अगले कुछ महीनों में चयन समिति के गठन और संभावित नामों पर होने वाली चर्चा टाटा समूह के भविष्य की दिशा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

प्रमुख खबरें

Imran Khan समर्थकों के मार्च से पहले Islamabad में रास्तों पर रखे गए शिपिंग कंटेनर

World Heart Federation के पूर्व अध्यक्ष ने शुरू किया था World Heart Day, साल 2000 में हुआ था पहला आयोजन

Ujjain में Shahi Masjid का हिस्सा हटाने पर बनी सहमति, हाईकोर्ट ने याचिकाओं का किया निपटारा

Asian Games में महिला Trap Team ने जीता रजत पदक, नीरू ने बनाया रिकॉर्ड