By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Oct 02, 2026
गंगटोक, दो अक्टूबर सिक्किम के ग्यालशिंग जिले के रिंबी में 54 परिवारों के लिए भूस्खलन ने केवल उनके घर ही नहीं छीने, बल्कि उनकी आजीविका के साधन भी प्रभावित किये। अब ये परिवार अनिश्चित भविष्य का सामना कर रहे हैं। सरकार इन परिवारों को स्थायी रूप से एक नए स्थान पर बसाने की योजना बना रही है, लेकिन इसे पूरा होने में कुछ महीने लग सकते हैं।
इन परिवारों के घरों के साथ-साथ कई मामलों में उनकी कृषि भूमि भी प्रभावित हुई है, जो उनकी आजीविका का मुख्य साधन थी। इस आपदा से सिंगलीटाम के सात परिवार भी प्रभावित हुए हैं। विस्थापित परिवार फिलहाल गांव के प्रशासनिक केंद्र में बनाए गए राहत शिविर में रह रहे हैं।
रिंबी निवासी सोनम पिंचोन शेरपा ने परिवारों की अनिश्चित स्थिति को बयां करते हुए कहा, ‘‘घर चला गया, (कृषि) जमीन चली गई, अब कमाई का कोई जरिया नहीं है।’’ शेरपा ने बताया कि क्षेत्र में 14 अगस्त से ही भूस्खलन हो रहे थे, लेकिन 24 सितंबर की रात के बाद स्थिति गंभीर हो गई। उन्होंने बताया कि उस रात बड़े पैमाने पर मिट्टी खिसकने के कारण गांव को खाली कराना पड़ा। शेरपा ने कहा कि प्रशासन राहत सामग्री और अन्य सहायता उपलब्ध करा रहा है, लेकिन इससे भविष्य को लेकर उनकी चिंताएं कम नहीं हुई हैं।
शेरपा ने अधिकारियों से प्रभावित क्षेत्र से बड़े-बड़े पत्थरों, उखड़े पेड़ों और मलबे को हटाने के लिए भारी मशीनरी तैनात करने का आग्रह किया। रोहित लिम्बू के लिए इस आपदा ने वर्षों की मेहनत से बनाए गए घर को छीन लिया है। रोहित ने बताया कि 11 साल की उम्र में ही उन्होंने अपने माता-पिता दोनों को खो दिया था और अपना घर बनाने के लिए 26 साल की उम्र तक मेहनत की।
उन्होंने कहा कि अब भूस्खलन ने उस घर को मलबे में तब्दील कर दिया है। रोहित खेती, एक छोटी दुकान और छोटे-मोटे काम करके अपने परिवार का भरण-पोषण करते थे, लेकिन अब घर एवं जमीन दोनों चले जाने के बाद उनके सामने न केवल घर दोबारा बनाने, बल्कि आजीविका फिर से खड़ी करने की भी चुनौती है। ग्यालशिंग के जिलाधिकारी तेनजिंग डी. डेंजोंगपा ने बताया कि 14 और 15 अगस्त की रात सिंगलीटाम में भारी भूस्खलन हुआ था, जबकि 24 सितंबर की रात रिंबी का बड़ा हिस्सा भूस्खलन की चपेट में आ गया।
डेंजोंगपा ने कहा कि नुकसान काफी होने के बावजूद किसी की जान नहीं जाना बड़ी राहत की बात है। प्रशासन ने प्रभावित 33 स्थायी परिवारों में से प्रत्येक को 1.30 लाख रुपये की सहायता दी है, जबकि 14 किरायेदार परिवारों को तत्काल सहायता के रूप में 50-50 हजार रुपये दिए गए हैं। डेंजोंगपा ने बताया कि दीर्घकालिक पुनर्वास के लिए उद्योग एवं विद्युत विभाग की जमीन का निरीक्षण किया गया है।
उन्होंने कहा कि सरकार की मंजूरी मिलने के बाद प्रभावित परिवारों के लिए ‘सिक्किम गरीब आवास योजना’ के तहत मकान बनाने का प्रस्ताव है, जबकि ‘भूमि बैंक योजना’ के माध्यम से जमीन उपलब्ध कराई जाएगी। गांव में भूस्खलन की आगे की घटनाओं को रोकने के उद्देश्य से सुरक्षा दीवार के निर्माण के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट भी तैयार की जा रही है। अधिकारियों ने बताया कि प्रशासन का लक्ष्य अगले पांच से छह महीनों में ज्यादातर प्रभावित परिवारों का स्थायी पुनर्वास करना है।