शांत विज्ञापन पट्टों का बोलता मोहल्ला (व्यंग्य)

By संतोष उत्सुक | Mar 26, 2021

मेरे पड़ोसी तालाब के किनारे, किसी ज़माने की मुसाफिर सराय के खंडहर की डहती दीवारों पर, पुराने व नए साइन बोर्ड्स का मोहल्ला है। किसी युग में हाथ से लिखे विज्ञापन गर्दन निकाल कर नयों को देख रहे हैं। यहां सबसे उजाड़ बोर्ड, इस जगह को टूरिस्ट कैफे बनाने के कई दशक पुराने सरकारी आदेश लिए हुए है। पिछले चुनावी बजट में दी गई सरकारी नौकरियों के लिए कोचिंग देने वाले फिर आ गए हैं, बता रहे हैं, उन जैसा कोई नहीं। एक प्रिंटिंग प्रेस वाले ने दो यहां, दो बोर्ड पास वाले बिजली के पोल पर भी छाप रखे हैं।

इन सबके बीच नगर परिषद् का साइन बोर्ड है जिसमें कोविड 19 सुरक्षा योजना के अंतर्गत अंग्रेजी व हिंदी में, सार्वजनिक स्थानों पर थूकने के लिए मना किया गया है। इस बोर्ड के ठीक नीचे और इधर उधर थूकने वाले सज्जन इसे कभी नहीं पढ़ते कि यदि कोई व्यक्ति थूकता हुआ पाया गया तो उसके खिलाफ कानूनी कारवाई की जाएगी तथा जुर्माना भी वसूला जाएगा। यह बोर्ड खुद को क़ानून का रखवाला, सेहत बढाने वाला समझता है लेकिन दूसरे बोर्ड इसका खूब मज़ाक उड़ाते लगते हैं। एक विशाल बोर्ड दूसरी दीवार पर लगा है, जो अपने वैभवशाली, शक्तिशाली मालिक की वजह से बहुत इतराता दिखता है। निश्चित ही नगर परिषद ने इसका किराया कम लिया होगा और ज्यादा महीने तक लगाने दिया होगा।

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यह सभी बोर्ड पर्यावरण के लिए नुकसानदेह सामग्री से बने हैं लेकिन इंसान से भी ज़्यादा निष्क्रिय होने के कारण कुछ कर नहीं सकते। आखिर इन्हें, किसी ने किसी को बेच दिया है और बिना आज्ञा यहां लटका दिया है। इस नामपट्टों के मोहल्ले में सालों पुराने, जंग लगे, कूड़ा हो चुके बोर्ड की इबारत, कड़ा सन्देश देते देते रोज़ मिटती जा रही है कि जो व्यक्ति तालाब या आसपास की खुली जगह पर कूड़ा, कचरा या काठ इत्यादि फेंकेगा उसे क़ानूनन दंडित किया जाएगा।

- संतोष उत्सुक

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