By अनन्या मिश्रा | Jul 28, 2026
आंध्र प्रदेश का सिंहाचलम मंदिर भगवान विष्णु के नरसिंह अवतार को समर्पित है। यह मंदिर बेहद दिव्य और अद्भुत है। आपको जानकर हैरानी होगी कि भगवान नरसिंह की मूर्ति से साल में सिर्फ 24 घंटे के लिए 'चंदन की परत' हटाई जाती है। तभी यह मंदिर दर्शन के लिए खुलता है। ऐसे में भक्त साल में सिर्फ 24 घंटे के लिए भगवान नरसिंह के असली विग्रह के दर्शन कर सकते हैं। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको इस मंदिर से जुड़ी कुछ अनोखी बातों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनको जानकर आप भी हैरान रह जाएंगे।
भगवान विष्णु को नरसिंह अवतार उग्रता और वीरता का प्रतीक है। पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक हिरण्यकशिपु का वध करने के बाद जब भगवान नरसिंह का क्रोध बहुत बढ़ गया, तो सभी देवताओं की भगवान नरसिंह को शांत कराने की कोशिश असफल रही।
जिसके बाद भगवान नरसिंह अपने परम भक्त प्रह्लाद की प्रार्थना पर शांत हुए और सिंहाचलम पर्वत पर प्रकट हुए। भगवान नरसिंह की उग्रता और तेज को कम करने के लिए उनको चंदन से शीतल रखा जाता है। यही वजह है कि साल भर भगवान नरसिंह चंदन से ढके रहते हैं, जिससे कि उनका स्वरूप सौम्य रहे।
बता दें कि चंदन की मोटी परत से ढके रहने की वजह से भगवान नरसिंह की मूर्ति एक शिवलिंग के आकार में दिखती है। सिर्फ अक्षय तृतीया के पावन दिन पर यह चंदन हटाया जाता है। जिसको 'निजरूप दर्शन' या 'चंदनोत्सव' भी कहा जाता है। सिर्फ इसी दिन भक्त भगवान के असली विग्रह को देख पाते हैं। अक्षय तृतीया के दिन इस मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है। वहीं नरसिंह जयंती पर भी भक्त मंदिर में दर्शन के लिए आते हैं।
आमतौर पर आपको भगवान नरसिंग के अन्य मंदिरों में भगवान का उग्र रूप देखने को मिलेगा। लेकिन सिंहाचलम मंदिर में भगवान नरसिंह मां लक्ष्मी के साथ बेहद सौम्य और शांत मुद्रा में विराजमान हैं। वहीं मंदिर की वास्तुकला में चोल, चालुक्य और कलिंग शैलियों का मिश्रण देखने को मिलेगा।