By रेनू तिवारी | Aug 18, 2026
अयोध्या स्थित श्री राम जन्मभूमि मंदिर में दान की चोरी के हाई-प्रोफाइल मामले में उत्तर प्रदेश सरकार के गृह विभाग ने विशेष जांच टीम (SIT) की अंतिम रिपोर्ट और उस पर आधारित कार्य योजना (Action Plan) श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को सौंप दी है। इस रिपोर्ट के आधार पर ट्रस्ट आगे की कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई करेगा। लखनऊ डिविज़नल कमिश्नर विजय विश्वास पंत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय SIT - जिसमें IG रेंज किरण एस. और स्पेशल सेक्रेटरी (वित्त) नील रतन कुमार शामिल थे - ने 23 जून को सौंपी गई अपनी शुरुआती रिपोर्ट में कई कड़े सुझाव दिए थे।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट ने पहले स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) से अपनी जांच में तेज़ी लाने और उसे तार्किक नतीजे तक पहुँचाने को कहा था। चीफ जस्टिस सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने SIT को निर्देश दिया था कि वह कथित दान चोरी मामले की जांच में हुई प्रगति की स्टेटस रिपोर्ट सीलबंद लिफ़ाफ़े में जमा करे।
CJI की बेंच ने कहा, "SIT, जिसमें एक फोरेंसिक ऑडिटर भी शामिल है, सुप्रीम कोर्ट को सीलबंद लिफ़ाफ़े में स्टेटस रिपोर्ट सौंपेगी। हम पहले इस रिपोर्ट की जांच करेंगे और तय करेंगे कि इसे सभी पक्षों को जारी किया जाए या नहीं।"
राजनीतिक घमासान
राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने पहले कहा था कि प्रधानमंत्री दान चोरी जैसे गंभीर आरोपों पर अपनी ज़िम्मेदारी से बच नहीं सकते। खड़गे ने कहा, "उन्हें सदन को बताना चाहिए कि ED, CBI, इनकम टैक्स और दूसरी जांच एजेंसियां कहां हैं? जो लोग भगवान राम के नाम पर लूट-पाट करते हैं, उन्हें पूरे देश से माफ़ी मांगनी चाहिए और देश को गुमराह करना बंद करना चाहिए।"
X पर एक पोस्ट में मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा, "श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट और इसमें कीमती चढ़ावे, नकद दान, ज़मीन की खरीद और मैनेजमेंट में गड़बड़ी के गंभीर आरोप सामने आए हैं। यह करोड़ों भक्तों की आस्था का मामला है। इस ट्रस्ट का गठन केंद्र सरकार ने किया था और प्रधानमंत्री मोदी ने खुद सदन में इसकी घोषणा की थी। केंद्र सरकार ने ट्रस्ट को 70 एकड़ से ज़्यादा ज़मीन सौंपी है और प्रधानमंत्री मोदी भूमि पूजन से लेकर प्राण प्रतिष्ठा समारोह तक हर अहम मौके पर मौजूद रहे हैं।"
वहीं, केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष के सदस्यों से उसी मुद्दे को बार-बार उठाने और सदन का कीमती समय बर्बाद करने के लिए माफ़ी की मांग की है।
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