चूक से लेकर शिकायतों को नज़रअंदाज़ करने तक, Ram Mandir दान पर SIT Report का खुलासा, सवालों में Champat Rai की भूमिका

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Jun 27, 2026

अयोध्या मंदिर में दान की चोरी के मामले में राम मंदिर ट्रस्ट के प्रमुख चंपत राय की भूमिका पर कड़ी नज़र रखी जा रही है। स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम ने पहले की शिकायतों को नज़रअंदाज़ करने और जानबूझकर की गई अनदेखी पर गंभीर सवाल उठाए हैं। एसआईटी ने इस मामले में कुछ लोगों को गिरफ़्तार किया, जिनमें से कुछ आरोपी राय के करीबी सहयोगी थे। इसके बाद शुक्रवार को राय ने राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के महासचिव पद से इस्तीफ़ा दे दिया। एसआईटी की रिपोर्ट में 27 अप्रैल से 5 जून के बीच रिकॉर्ड किए गए CCTV फुटेज की जांच की गई। रिपोर्ट के अनुसार, मंदिर में दान की गिनती करने वाले कर्मचारी 40 दिनों के दौरान लगभग 70 बार कैश चुराते हुए देखे गए। सूत्रों का कहना है कि रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इस मामले में गिरफ़्तार किए गए सभी लोगों को चंपत राय और अनिल मिश्रा की सिफारिश पर दान की गिनती के काम में लगाया गया था।

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चंपत राय के बारे में SIT की रिपोर्ट क्या कहती है?

सूत्रों के मुताबिक, चंपत राय ने मंदिर में निगरानी और दान की गिनती का काम सीधे नहीं संभाला, बल्कि यह काम दूसरे अधिकारियों को सौंप दिया था। उन पर यह आरोप भी है कि दान की चोरी से जुड़ी शिकायतों को उन्होंने नज़रअंदाज़ किया, जबकि उन्हें ऐसी कई घटनाओं के बारे में पता था। कहा जाता है कि चोरी में शामिल लोग उनके करीबी सहयोगी थे और उन्हें उनकी सिफारिश पर ही मंदिर में काम पर रखा गया था। यह भी आरोप है कि पहले भी कैश बरामद होने के बावजूद, उन्होंने इस मामले में पुलिस से संपर्क नहीं किया। इस मामले में गिरफ्तार किए गए आठ लोगों में से सिर्फ़ टिन्नू यादव और सुभाष श्रीवास्तव ही राम मंदिर ट्रस्ट के कर्मचारी थे, जबकि बाकी आरोपी स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया (SBI) के पेरोल पर थे, जो दान की गिनती में मदद करता है। सूत्रों ने यह भी दावा किया है कि अनिल मिश्रा के ट्रस्टी बनने के बाद उनकी संपत्ति में हुई बढ़ोतरी पर भी सवाल उठाए गए हैं, हालांकि इस पहलू पर कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है। 

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टिन्नू यादव का इतना दबदबा कैसे था?

सूत्रों के अनुसार, राम शंकर यादव, उर्फ ​​टिन्नू यादव पर चोरी में मुख्य भूमिका निभाने का आरोप है। SIT की रिपोर्ट के मुताबिक, दान की रकम रखने वाले बक्सों की चाबियां उसके पास थीं और मंदिर के कामकाज में उसका काफी प्रभाव था। इसमें कर्मचारियों की नियुक्ति, दान की गिनती के लिए लोगों का चयन और यहां तक ​​कि मंदिर परिसर में पुलिसकर्मियों की तैनाती तय करना भी शामिल था। एक और मुख्य आरोपी, रामाशंकर मिश्रा को कथित तौर पर टिन्नू यादव की सिफारिश पर काम पर रखा गया था। शुरुआत में उसे मंदिर के फैसिलिटेशन सेंटर में तैनात किया गया था, लेकिन बाद में वह दान की गिनती के काम में शामिल हो गया। SIT की रिपोर्ट के अनुसार, CCTV फुटेज में उसे कई बार दान की रकम से कैश चुराते हुए देखा गया। 

चोरी के दौरान CCTV कैमरे बंद किए गए या उनका व्यू ब्लॉक किया गया

एसआईटी के मुताबिक, सभी आठ आरोपियों जिनमें टिन्नू यादव, मनीष यादव, लव कुश मिश्रा और अनुकल्प मिश्रा शामिल हैं। काउंटिंग सेंटर के अंदर CCTV कैमरों की लोकेशन और 'ब्लाइंड स्पॉट' (जहाँ कैमरे की नज़र नहीं पहुँचती) के बारे में पता था। रिपोर्ट में आरोप है कि जब आरोपी कैश चुरा रहे होते थे, तो वे कभी-कभी कैमरे बंद कर देते थे या उनके व्यू को रोक देते थे। हालाँकि, जांच करने वालों का कहना है कि आरोपियों को इस बात की जानकारी नहीं थी कि काउंटिंग रूम के अंदर एक छिपा हुआ सर्विलांस कैमरा भी लगाया गया था। SIT के अनुसार, इसी छिपे हुए कैमरे की फुटेज से आखिरकार कथित चोरी का पता चला और यह जांच का एक अहम हिस्सा बनी।

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