By दिव्यांशी भदौरिया | Aug 21, 2026
अक्सर हम सभी नींद को लेकर काफी परेशान रहते हैं। हर बार यही सोचते हैं कि 'इस वीकेंड हफ्ते भर की नींद पूरी करेंगे....' लेकिन ऐसा हो नहीं पता है। जब हमारा पूरा हफ्ता भागदौड़ में बीतता है और आखिर में हम यही सोच लेते हैं कि छुट्टी वाले दिन या वीकेंड पर नींद पूरी करके हम अपनी थकान दूर करेंगे, हालांकि ऐसा हो नहीं पाता है।
ऐसे में 'स्लीप डेट' (Sleep Debt) या स्लीप डेफिसिट बढ़ जाता है। आखिर यह क्या है, इसके क्या लक्षण है और कैसे यह आपके पूरे शरीर और मन प्रभावित करता है, आइए आपको बताते हैं।
Sleep Debt क्या होता है?
दरअसल, 'स्लीप डेट' तब होता है जब आपको नींद की जरुरत है और असल में आपको मिलने वाली नींद की मात्रा में अंतर होना। यह सब तब होता है जब आपकी नींद पूरी न हो, आप देर तक काम करते हैं, तनाव की वजह से सो नहीं पा रहे हैं या आपके सोने का कोई तय समय नहीं होता है। रोजाना एक या दो घंटे कम सोने से भी 'स्लीप डेट' हो सकता है और इसका आपकी सेहत पर बुरा असर पड़ सकता है।
नींद की कमी के लक्षण
- थकान होना
- सुबह उठने में मुश्किल अधिक होना
- दिन में बहुत ज्यादा नींद आना
- ध्यान और फोकस की कमी
- भूलने की आदत
- सिरदर्द
- चिड़चिड़ापन
शरीर पर बुरा असर डालती है नींद की कमी
अक्सर नींद की कमी से लोगों की शारीरिक और मानसिक सेहत खराब हो जाती है। नींद न आने (इंसोम्रिया) के चलते इम्यून सिस्टम का कमजोर होना, मेटाबॉलिज्म पर असर दिखना, वजन पर असर होना और बार-बार बीमार बनें रहने की समस्या देखी जाती हैं। वहीं, पर्याप्त नींद न लेने से आपकी याददाश्त, सीखने की क्षमता और ध्यान लगाने की शक्ति पर काफी असर देखने को मिलता है।
इतना ही नहीं, तनाव और बेचैनी महसूस होती है। नींद की भारी कमी होने पर आपको मेंटल हेल्थ जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं।
रोजाना कितनी नींद है जरूरी?
डॉक्टर मानते हैं कि कम से कम रोजाना 8-9 घंटे की नींद लेना बहुत जरुरी है। वहीं आपकी स्लीप साइकिल तय होनी चाहिए। किसी भी तरह से पूरी नींद नहीं ले पा रहे हैं, तो आप इस बात का ध्यान दें। यदि आपको नींद आने में काफी दिक्कत होती है तो लाखों कोशिशों के बाद भी नींद नहीं आती है, तो डॉक्टर को जरुर दिखाएं।