By दिव्यांशी भदौरिया | Jan 06, 2026
इस समय पहला ज्योतिर्लिंग सोमनाथ मंदिर काफी सुर्खियों में है। सोमनाथ मंदिर गुजरात में स्थित है। यह देश के सबसे महत्वपूर्ण तीर्थस्थलों और 12 शिव ज्योतिर्लिंग में से एक है। इस मंदिर का इतिहास भी काफी पुराना है और धरोहर समेटे हुए है। गौरतलब है कि सोमनाथ का मंदिर का जिक्र होता है तो कहा जाता है कि यहां 1 या 2 नहीं बल्कि बार-बार हमले हुए। इतिहासकारों को मुताबिक, इस मंदिर पर 17 बार हमला हुआ और मुगलों ने इसे लूटा था। आइए आपको इस लेख में बताते हैं मंदिर पर कब-कब हमले हुए, इसका इतिहास और इसकी भव्यता की कहानी क्या है?
शिवपुराण में भी सोमनाथ मंदिर का उल्लेख है
सोमनाथ मंदिर गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र के प्रभास पाटन, वेरावल में समुद्र तट पर स्थित है। बता दें कि, यह मंदिर भगवान शिव के 12 पवित्र ज्योतिर्लिंग में से एक है। सोमनाथ मंदिर का उल्लेख शिवपुराण के अध्याय-13 में भी है। इतिहासकार के मुताबिक, इस मंदिर को सोने-चांदी और पत्थरों से बनवाया था लेकिन इस पर मुगलों द्वारा कई बार हमला किया गया।
महमूद गजनवी ने किया था पहला हमला
11वीं सदी में विदेशी आक्रमणों की कड़ी की शुरुआत महमूद गजनवी से मानी जाती है। वर्ष 1026 में, गुजरात के शासक भीम प्रथम के समय तुर्क शासक महमूद गजनवी ने सोमनाथ मंदिर पर आक्रमण कर उसे भारी नुकसान पहुंचाया और पवित्र ज्योतिर्लिंग को खंडित कर दिया। वर्ष 1169 के एक शिलालेख के अनुसार, सोलंकी वंश के राजा कुमारपाल (1143–1172 ई.) ने इस पवित्र स्थल का पुनर्निर्माण करवाया और मंदिर को पुनः भव्य रूप देते हुए उसे रत्नों से सजाया।
1299 में अलाउद्दीन खिलजी के सेनापति ने लूटा
आपको बता दें कि, 1299 में गुजरात पर आक्रमण हुआ। इस दौरान अलाउद्दीन खिलजी की सेना का नेतृत्व उलुघ खान कर रहा था। उसने वाघेला राजा कर्ण को हराया और सोमनाथ मंदिर को लूटा था।
1308 में पुनर्निर्माण, 1395 में जफर खान का हमला
वर्ष 1308 में सौराष्ट्र के चूड़ासमा राजा महिपाल प्रथम ने दोबारा इसका निर्माण कराया था। इनके बेटे खेंगारा ने 1331 और 1351 के बीच लिंगम की स्थापना की थी। लेकिन, 1395 में जफर खान मंदिर पर हमला किया और इसे नष्ट कर दिया। इतिहासकारों का मानना है कि इसी तरह से 17 बार मंदिर पर हमला हुआ था और मुगल इसे लूटते रहे।
मंदिर की भव्यता किसने बढ़ाई?
लगातार 17 बार मंदिर पर हमले के बाद इसकी भव्यता तब बढ़ी, जब भारत के लौह पुरुष और उप-प्रधानमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल ने 12 नवंबर 1947 को जूनागढ़ आए। उन्होंने सोमनाथ मंदिर के दोबारा बनाने का आदेश दिया। पैसे एकत्र करने और मंदिर के निर्माण की देखरेख के लिए सोमनाथ ट्रस्ट की स्थापना की गई। वहीं, 11 मई 1951 को भारत के राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने मंदिर में मूर्ति स्थापना समारोह किया। जिसके बाद से मंदिर की भव्यता बढ़ गई।
सोमनाथ मंदिर क्यों चर्चा में है?
आपको बता दें कि, सोमनाथ ट्रस्ट के चेयरमैन भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी है। यह मंदिर इसलिए भी चर्चा में है, क्योंकि मंदिर पर 1026 में हुए पहले आक्रमण के 1000 साल पूरे हुए हैं। सोमनाथ मंदिर को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक्स पर पोस्ट भी किया है।