Sonia Gandhi ने Instagram पर किया डेब्यू, अपनी किताब की पहली झलक की साझा

By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Oct 22, 2026

कांग्रेस संसदीय दल की प्रमुख सोनिया गांधी ने बृहस्पतिवार को सोशल मीडिया में दस्तक देते हुए अपने ‘इंस्टाग्राम’ पेज की शरुआत की और अपनी पुस्तक की पहली झलक साझा की। उन्होंने पहली बार किसी सोशल मीडिया मंच पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। वह अब तक सोशल मीडिया से दूरी बनाए हुए थीं।

राहुल गांधी समेत इंस्टाग्राम पर मौजूद कांग्रेस के कई शीर्ष नेताओं ने भी पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष के अकाउंट को ‘फॉलो’ किया। कांग्रेस के कई नेताओं ने सोशल मीडिया पर सोनिया गांधी का स्वागत किया और उनकी आगामी पुस्तक को लेकर उत्सुकता जाहिर की। सोनिया गांधी ने इंस्टाग्राम पर अपनी पहली पोस्ट में आगामी पुस्तक ‘बिलॉन्गिंग: ए जर्नी ऑफ लव’ की प्रतियां प्राप्त करते हुए अपना एक वीडियो साझा किया।

उन्होंने पोस्ट में कहा, ‘‘सभी को नमस्कार। इस पल को आप सभी के साथ साझा करते हुए मैं वास्तव में बहुत आभारी हूं। यह ‘बिलॉन्गिंग: ए जर्नी ऑफ लव’ की पहली झलक है।’’ सोनिया गांधी ने कहा, ‘‘यह प्रेम, कर्तव्य, अपनों को खोने और अपनेपन की जगह तलाशने की कहानी है।

मैं इसे आप सभी के साथ साझा करने को लेकर उत्सुक हूं।’’ वीडियो में सोनिया गांधी अपनी पुस्तक की पहली प्रति लेते हुए दिखाई देती हैं और इस अवसर पर अपनी बेटी प्रियंका गांधी वाद्रा के साथ मिठाई बांटती नजर आ रही हैं। वह यह भी बताती हैं कि पुस्तक में बहुत सारी तस्वीरें हैं। इंस्टाग्राम पर उनके दस्तक देने के कुछ घंटे के भीतर ही उनके पहले वीडियो को 1.80 लाख लोगों ने लाइक किया।

अपनी दूसरी इंस्टाग्राम पोस्ट में सोनिया गांधी ने पुस्तक के पन्ने पलटते हुए अपनी एक तस्वीर साझा की। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने उस वीडियो को पोस्ट करते हुए कहा, ‘‘कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी का बहुप्रतीक्षित संस्मरण 10 नवंबर को प्रकाशित होगा।’’ ‘हार्पर कॉलिन्स इंडिया’ ने पिछले महीने घोषणा की थी कि वह सोनिया गांधी का संस्मरण ‘बिलॉन्गिंग: ए जर्नी ऑफ लव’ भारत में 10 नवंबर को प्रकाशित करेगा। इस घोषणा के साथ पुस्तक के भारत में प्रकाशन को लेकर बनी अनिश्चितता समाप्त हो गई थी।

इससे पहले लेखिका के प्रतिनिधियों और ‘पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया’ के बीच ‘‘गतिरोध’’ की बात सामने आई थी। ‘हार्पर कॉलिन्स इंडिया’ ने एक बयान में कहा था, ‘‘हमारे समय के सबसे बहुप्रतीक्षित राजनीतिक संस्मरणों में से एक ‘बिलॉन्गिंग’ प्रेम, पहचान, कर्तव्य और अपनेपन की एक नाटकीय एवं बेहद निजी कहानी है। यह भारत की यात्रा को भीतर से देखने का एक दुर्लभ अवसर भी प्रदान करती है।’’ ‘हार्पर कॉलिन्स इंडिया’ की यह घोषणा ‘पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया’ (पीआरएचआई) से जुड़े विवाद के बाद हुई थी।

पीआरएचआई शुरुआत में इस संस्मरण को प्रकाशित करने का इच्छुक था, लेकिन बाद में उसने कहा कि वह भारत में इसका प्रकाशक नहीं होगा। पुस्तक की पांडुलिपि में संपादकीय बदलावों को लेकर प्रकाशक और लेखिका के प्रतिनिधियों के बीच मतभेद की खबरों के बाद विवाद शुरू हुआ था। कांग्रेस के कई नेताओं ने इस दौरान सरकारी दबाव और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़े सवाल उठाए थे।

कुछ नेताओं ने आरोप लगाया था कि ‘पेंगुइन इंडिया’ पर पुस्तक से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और मोदी सरकार के दौरान भारतीय क्षेत्र पर चीन के कब्जे से संबंधित अंश हटाने का दबाव था। हालांकि, पीआरएचआई ने ‘पीटीआई’ को दिए एक बयान में कहा था कि वह पुस्तक प्रकाशित करने को लेकर ‘‘वास्तव में उत्सुक’’ था और इसे हासिल करना काफी प्रयास से संभव हुआ था, लेकिन एक विशेष मुद्दे पर गतिरोध के कारण अंततः उसने इससे अलग होने का फैसला किया। पीआरएचआई ने इस बात पर जोर दिया था कि उस पर किसी तरह का बाहरी दबाव नहीं था।

हालांकि, उसने गोपनीयता संबंधी प्रावधानों और लेखिका के साथ हुए समझौते का हवाला देते हुए गतिरोध की वास्तविक वजह बताने से इनकार कर दिया था। ‘बिलॉन्गिंग’ की शुरुआत इटली में सोनिया गांधी के बचपन से होती है और फिर उनकी कैम्ब्रिज तक की यात्रा का जिक्र करती है, जहां 1965 में उनकी मुलाकात राजीव गांधी से हुई थी। संस्मरण में राजीव गांधी से उनके विवाह, अपनी सास एवं पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से परिचय तथा भारत में जीवन के साथ तालमेल बैठाने के उनके प्रयासों का भी उल्लेख है।

इनमें हिंदी सीखना, साड़ी पहनना और भारतीय खानपान एवं संस्कृति को अपनाना शामिल है। पुस्तक में गांधी परिवार को झकझोर देने वाली प्रमुख त्रासदियों का भी जिक्र है। इनमें विमान दुर्घटना में संजय गांधी की मृत्यु, 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या और 1991 में राजीव गांधी की हत्या शामिल हैं।

संस्मरण में 2004 के लोकसभा चुनाव के बाद कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन की जीत से जुड़ी राजनीतिक घटनाओं का भी उल्लेख किया गया है। उस समय सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री पद स्वीकार करने से इनकार कर दिया था और इसके बजाय कांग्रेस तथा उसके गठबंधन का नेतृत्व किया था। इस गठबंधन ने अगले एक दशक तक केंद्र में सरकार चलाई।

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