दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ने मोदी से मांगी ये 3 मदद, चिढ़े किम जोंग, दिया ये ऑर्डर

By अभिनय आकाश | Apr 21, 2026

दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे मंग भारत आए और जैसे ही दिल्ली में उन्हें राजशाही अंदाज में गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया उसी पर दिल्ली से करीब 4700 किमी दूर पोंगयांग में हलचल तेज हो गई। जहां किम जोंग उन पूरे इवेंट को टुकुर टुकुर टीवी पर देख रहा था। नजरें जमाए बैठा था। दिल्ली सिर्फ एक कूटनीतिक मुलाकात का गवाह नहीं बनी है। बल्कि एशिया की ताकत के बदलते समीकरणों की एक बड़ी कहानी भी दिल्ली में लिखी जा रही है। बता दें कि यहां पर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जय म्यूंग की मुलाकात हुई है। इन्होंने हैदराबाद हाउस में एक बैठक की और यह हाई लेवल बैठक थी। बता दें कि राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू ने राष्ट्रपति भवन में उनका भव्य स्वागत किया। लेकिन यहां पर सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि यह मुलाकात क्यों हुई? कैसे हुई? सवाल यह है कि इस मुलाकात को सबसे ज्यादा ध्यान से कौन देख रहा है? जवाब है उत्तर कोरिया। 

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यही वजह है कि इस वक्त किम जोंग उन कुछ ज्यादा ही एक्टिव नजर आ रहे हैं। हर मूवमेंट पर वो नजर रख रहे हैं। पिछले एक महीने में ही उत्तर कोरिया ने बता दें कि लगातार चार बैलस्टिक मिसाइलें टेस्ट की हैं। जो यह साफ दिखाता है कि प्यायोंगयांग अपनी सैन्य ताकत का प्रदर्शन कर रहा है और किसी भी संभावित खतरे के लिए खुद को तैयार रख रहा है या कहे कि एक नया फ्रंट खोलने की कोशिश कर रहा है। इस बीच दक्षिण कोरिया का भारत दौरा किम के लिए एक नया समीकरण खड़ा करता है। उन्हें किम जोंगून को ये डर है कि कहीं भारत और दक्षिण कोरिया के बीच कोई नई हथियार डील ना हो जाए। कोई डिफेंस स्ट्रेटजी ना तैयार की जाए जो उसके खिलाफ हो जाए या फिर इंडोपेसिफिक में ऐसा कोई प्लान ना बन जाए जो भविष्य में उत्तर कोरिया पर ही बैकफायर कर जाए। और यही वजह है यही कारण है कि पियोंगयांग में बैठा किम जोंग उन दिल्ली में हो रही हर मीटिंग हर बयान और हर समझौते पर बारीकी से नजर रख रहा है क्योंकि इस बार मामला सिर्फ बता दें कि एक विजिट एक दौरे का नहीं है बल्कि एशिया में बदलते शक्ति संतुलन का भी है और यह बिल्कुल साफ है। 

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दरअसल बता दें कि भारत और दक्षिण कोरिया के बीच स्पेशल स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप की शुरुआत साल 2010 में हुई थी और आज यानी कि मौजूदा समय में यह साझेदारी कई अहम क्षेत्रों में फैल चुकी है। रक्षा सहयोग हो या फिर सेमीकंडक्टर हो या फिर टेक्नोलॉजी हो या फिर बैटरी हो या फिर इलेक्ट्रिक व्हीकल की बात करें। सप्लाई चेन, साइबर सिक्योरिटी, इंडोपेसिफिक सुरक्षा दोनों देशों के बीच व्यापार हो। यह कई अहम मुद्दे हैं। 30 मिलियन डॉलर से ज्यादा का व्यापार दोनों देशों के बीच हो चुका है और आने वाले समय में इसे और भी ज्यादा बढ़ाने की तैयारी भी है। और इस बार की यात्रा इसलिए भी खास है क्योंकि 8 साल बाद किसी दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति का यह भारत दौरा है।

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