By Ankit Jaiswal | Oct 15, 2026
एआई के बढ़ते इस्तेमाल के बीच दुनिया भर की तकनीकी कंपनियां अपने खर्च कम करने और काम करने के तरीके बदलने में जुटी हैं। कई कंपनियां कर्मचारियों की संख्या घटाने का रास्ता अपना रही हैं, लेकिन भारतीय सॉफ्टवेयर कंपनी जोहो के संस्थापक श्रीधर वेम्बू ने इससे अलग रुख अपनाया है। उन्होंने साफ कहा है कि कंपनी बढ़ते खर्च के दबाव के बावजूद कर्मचारियों को नौकरी से निकालने के बजाय उन्हें नए कौशल सिखाने और दूसरे कामों में लगाने पर ध्यान देगी।
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए वेम्बू ने कहा कि सॉफ्टवेयर सेवा उद्योग में इस तरह के फैसले सामान्य होते जा रहे हैं, लेकिन जोहो ने अब तक इस रास्ते को नहीं अपनाया है। उनका मानना है कि एआई से काम की रफ्तार बढ़ने का मतलब यह नहीं होना चाहिए कि कर्मचारियों की नौकरियां खत्म कर दी जाएं।
वेम्बू के मुताबिक, जब एआई की मदद से कम लोगों के साथ ज्यादा काम करना संभव हो जाता है, तो कंपनी कर्मचारियों को नए उत्पाद तैयार करने और ग्राहकों की बेहतर मदद करने के लिए प्रशिक्षित कर सकती है। उनका कहना है कि जोहो कर्मचारियों को हटाने के बजाय उनकी क्षमता का इस्तेमाल दूसरे कामों में करने की कोशिश करेगी।
बता दें कि एयरटेबल स्प्रेडशीट और आंकड़ों को व्यवस्थित करने वाला एक सॉफ्टवेयर है। इस साल अगस्त में बेंडिंग स्पून्स ने इसे 1.28 अरब डॉलर में खरीदा था। हालांकि, छंटनी के फैसले से कितने कर्मचारी प्रभावित हुए हैं, इसकी स्पष्ट संख्या सामने नहीं आई है।
जोहो की यह नीति ऐसे समय आई है, जब कंपनी भी बढ़ते खर्चों से दबाव महसूस कर रही है। कुछ दिन पहले वेम्बू ने बताया था कि कंपनी बड़े पैमाने पर छंटनी से बचने की कोशिश कर रही है। हालांकि, इस साल कर्मचारियों के नियमित प्रदर्शन मूल्यांकन को रद्द कर दिया गया है और वेतन में सामान्य बढ़ोतरी भी नहीं की जा सकेगी।
वेम्बू ने कहा कि कंपनी का कारोबार बढ़ रहा है, लेकिन आंकड़ों को संभालने वाले केंद्रों और एआई से जुड़ी सेवाओं का खर्च भी तेजी से बढ़ा है। ऐसे में जोहो ने निवेशकों के दबाव में चलने वाली कंपनियों और शेयर बाजार में सूचीबद्ध कंपनियों से अलग रास्ता चुना है।
गौरतलब है कि जोहो पिछले 18 महीनों से अपने कर्मचारियों की संख्या नहीं बढ़ा रही है। कंपनी ने विपणन पर होने वाला खर्च भी घटाया है। वेम्बू के अनुसार, कंपनी को एआई के दौर के हिसाब से खुद को नए सिरे से तैयार करना होगा। इस रणनीति का असर 2030 तक दिखाई देने की उम्मीद है।
जोहो का यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब तकनीकी क्षेत्र में कर्मचारियों की नौकरियों पर खतरा बढ़ रहा है। माइक्रोसॉफ्ट, मेटा, ओरेकल और टीसीएस जैसी कंपनियां भी हाल के महीनों में हजारों कर्मचारियों की छंटनी कर चुकी हैं। छंटनी पर नजर रखने वाली वेबसाइट लेऑफ्स.एफवाईआई के आंकड़ों के मुताबिक, 2026 में अब तक 1,31,000 से अधिक तकनीकी कर्मचारियों की नौकरियां जा चुकी हैं। नेटफ्लिक्स में भी करीब 1,000 कर्मचारियों की छंटनी की खबर सामने आई है।
ऐसे माहौल में जोहो की रणनीति इस बात पर टिकी है कि एआई से होने वाले फायदे का इस्तेमाल कर्मचारियों को हटाने के बजाय उनकी भूमिका बदलने में किया जाए। हालांकि, इस फैसले की सफलता आने वाले वर्षों में ही स्पष्ट होगी और कंपनी को बढ़ते खर्च के साथ कारोबार की रफ्तार बनाए रखने की चुनौती का सामना करना होगा।