शेयर बाजार में बिकवाली का दबाव, IT Sector शेयरों ने गिरावट के बीच संभाला मोर्चा

By Ankit Jaiswal | Sep 15, 2026

शेयर बाजार में मंगलवार को कारोबार के दौरान तेजी से गिरावट देखने को मिली। सुबह की बढ़त पूरी तरह गायब हो गई और सेंसेक्स दिन के ऊपरी स्तर से करीब 1,400 अंक फिसलकर गहरे लाल निशान में बंद हुआ। सेंसेक्स 777.94 अंक यानी 1.04 प्रतिशत गिरकर 74,003.82 पर रहा। वहीं निफ्टी 279.50 अंक यानी 1.19 प्रतिशत टूटकर 23,118.60 पर बंद हुआ।

क्षेत्रवार देखें तो सूचना तकनीक और दवा कंपनियों के शेयरों ने बाजार को कुछ सहारा दिया। इसके उलट बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं के शेयरों में दबाव रहा। निफ्टी की 50 कंपनियों में सिर्फ 10 शेयर बढ़त के साथ बंद हुए। एचसीएल टेक्नोलॉजीज और इंफोसिस करीब चार प्रतिशत चढ़े, जबकि टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज और टेक महिंद्रा में दो प्रतिशत से ज्यादा की तेजी रही। निफ्टी सूचना तकनीक सूचकांक दिन में पांच प्रतिशत से ज्यादा उछला, लेकिन बाद में बढ़त कम होकर करीब दो प्रतिशत पर बंद हुई।

एचडीएफसी बैंक भी एक प्रतिशत से ज्यादा चढ़ा। बैंक ने प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी के पद के लिए दो नाम भारतीय रिजर्व बैंक को भेजे हैं। इसके उलट आईसीआईसीआई बैंक और लार्सन एंड टुब्रो जैसे बड़े शेयरों ने निफ्टी पर ज्यादा दबाव बनाया।

सोलर इंडस्ट्रीज के शेयरों में सबसे ज्यादा हलचल देखने को मिली। कंपनी ने बताया कि उसकी अधीनस्थ कंपनी दक्षिण अफ्रीका की ओम्निया होल्डिंग्स को करीब 1.36 अरब डॉलर में पूरी नकद राशि देकर खरीदेगी। खबर के बाद निवेशकों की प्रतिक्रिया कमजोर रही और शेयर दिन के दौरान 14.5 प्रतिशत तक गिरकर 19,065 रुपये पर पहुंच गया। अंत में भी इसमें करीब 14 प्रतिशत की गिरावट रही। रक्षा क्षेत्र के सूचकांक में भी करीब छह प्रतिशत की गिरावट आई। डेटा पैटर्न्स इंडिया लगभग 10 प्रतिशत और मिश्र धातु निगम नौ प्रतिशत से ज्यादा टूटा।

दूसरी ओर टाटा समूह की कंपनियों में जोरदार खरीदारी हुई। खबरों में भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा टाटा संस की निवेश कंपनी के रूप में बने रहने से जुड़ी अर्जी खारिज किए जाने की बात सामने आने के बाद टाटा केमिकल्स 20 प्रतिशत चढ़कर 734.90 रुपये पर ऊपरी सीमा में बंद हुआ। टाटा इन्वेस्टमेंट कॉरपोरेशन में भी 10 प्रतिशत से ज्यादा की तेजी रही।

गौरतलब है कि बाजार में दबाव की सबसे बड़ी वजह कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें हैं। पश्चिम एशिया में संघर्ष फैलने की आशंका के बीच ब्रेंट कच्चा तेल एशियाई कारोबार में 108 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर चला गया। यमन के हूती समूह के सऊदी अरब पर नए हमलों और लाल सागर के पास उसकी गतिविधियों ने ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ाई है। भारत दुनिया के बड़े तेल आयातकों में है, इसलिए महंगा तेल महंगाई और कंपनियों की लागत दोनों पर असर डाल सकता है।

वैश्विक बाजार से भी निवेशकों को राहत नहीं मिली। अमेरिका में 10 साल की सरकारी ऋण प्रतिभूतियों पर ब्याज दर अक्टूबर 2023 के बाद पहली बार पांच प्रतिशत के करीब पहुंची। इसे दुनिया की वित्तीय व्यवस्था के लिए अहम संकेत माना जाता है, क्योंकि अमेरिका में कर्ज की कई दरें इसी के आसपास तय होती हैं। ऊंची दरें उभरते बाजारों से विदेशी निवेश निकलने का दबाव बढ़ा सकती हैं।

तकनीकी स्तर पर भी निफ्टी कमजोर दिख रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक तेजी लौटने के लिए 23,500 से 23,600 के ऊपर टिकना जरूरी है। बजाज ब्रोकिंग के उपाध्यक्ष शोध पाबित्रो मुखर्जी ने कहा कि 23,500 के ऊपर मजबूती आने पर 23,650 तक वापसी हो सकती है, जबकि कमजोरी बनी रहने पर 23,230 से 23,500 के दायरे में कारोबार हो सकता है। 23,231 के पिछले निचले स्तर के नीचे जाने पर 23,070 के आसपास अगला सहारा मिल सकता है।

इस बीच भारत अस्थिरता सूचकांक करीब 9 प्रतिशत बढ़कर 13.43 पर पहुंच गया। इसका बढ़ना बताता है कि बाजार में अगले कुछ दिनों को लेकर बेचैनी बढ़ी हुई है और निवेशकों के लिए सावधानी के संकेत हैं।

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