Rani Laksmi Bai Jayanti 2025 | पीएम मोदी ने रानी लक्ष्मीबाई को किया नमन, बोले- उनकी वीरता की कहानियां अमर हैं

By रेनू तिवारी | Nov 19, 2025

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि दी। लक्ष्मीबाई ने 1857 के विद्रोह - भारत के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम - में अंग्रेजों के विरुद्ध महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उन्होंने ब्रिटिश सेनाओं से बहादुरी से लड़ते हुए अपने प्राण न्योछावर कर दिए, जो उनके राज्य पर कब्जा करने की कोशिश कर रही थीं।

झाँसी की रानी। वह साहस और वीरता की प्रतिमूर्ति थीं। उनका जन्म एक मराठा परिवार में हुआ था और अंग्रेजों के खिलाफ स्वतंत्रता संग्राम में उनका एक महत्वपूर्ण नाम था। औपनिवेशिक भारत के इतिहास में, एक महिला का साहस एक किंवदंती बन गया। जब अंग्रेजों ने हड़प नीति (डॉक्ट्रिन ऑफ़ लैप्स) के ज़रिए अपनी पकड़ मज़बूत की और 1857 के विद्रोह की ज्वाला भड़क उठी, रानी लक्ष्मीबाई एक सशक्त नेता के रूप में उभरीं और उन्होंने भारी बाधाओं के बावजूद अपने लोगों को एकजुट किया। 

इसे भी पढ़ें: गैंगस्टर का खेल खत्म, दिल्ली में होगा हिसाब! अमेरिका ने अनमोल बिश्नोई को भारत को सौंपा, बिश्नोई सिंडिकेट पर शिकंजा कसेगी एजेंसियां

रानी लक्ष्मीबाई का जन्म 19 नवंबर 1828 को वाराणसी शहर में हुआ था। उनका नाम मणिकर्णिका तांबे और उपनाम मनु था। उनके पिता मोरोपंत तांबे और उनकी मां भागीरथी सप्रे (भागीरथी बाई) थीं; वे आधुनिक महाराष्ट्र से थे। चार साल की उम्र में उनकी माँ का निधन हो गया। उनके पिता बिठूर जिले के पेशवा बाजी राव द्वितीय के अधीन युद्ध के कमांडर थे। रानी लक्ष्मी बाई की शिक्षा घर पर हुई, वे पढ़ने और लिखने में सक्षम थीं, और अपने हमउम्र की अन्य लड़कियों की तुलना में बचपन में अधिक स्वतंत्र थीं; 

प्रमुख खबरें

Asian Games फाइनल में Pakistan को 19 रन से हराकर भारत ने जीता Gold Medal

Sharad Pawar बोले, Maharashtra में Drought पीड़ितों की मदद करना NCP SP की सर्वोच्च प्राथमिकता

Asian Games Final में China के खिलाफ भारतीय टीम को कोच Sjoerd Marijne ने दी थी शेर जैसी एकाग्रता की सीख

UP Congress के Reshuffle पर OP Rajbhar का तंज, कहा- इस बदलाव से कोई फर्क नहीं पड़ेगा