Subhash Chandra बोले: दिवाला प्रक्रिया में दावा सिर्फ 3,992 करोड़ रुपये

By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Aug 27, 2026

मीडिया क्षेत्र के दिग्गज सुभाष चंद्रा ने बृहस्पतिवार को कहा कि व्यक्तिगत दिवाला कार्यवाही में उनके खिलाफ कुल दावा केवल 3,992 करोड़ रुपये का है और वह केवल व्यक्तिगत गारंटर थे, कर्ज लेने वाले नहीं। चंद्रा ने उनके खिलाफ 22,000 करोड़ रुपये से अधिक के बकाया पर कर्जदाताओं के दावों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्होंने किसी भी कर्जदाता से कोई पैसा उधार नहीं लिया है। उन्होंने बयान में कहा, ‘‘व्यक्तिगत दिवाला कार्यवाही में योजना पर आपत्ति जताने वाले पक्षों की ओर से व्यक्तिगत गारंटर के तौर पर सुभाष चंद्रा के खिलाफ कुल दावा केवल 3,992 करोड़ रुपये का है, न कि 22,000 करोड़ रुपये।’’ उन्होंने कहा कि इसमें से 620 करोड़ रुपये का दावा निपटाया जा चुका है, जबकि कर्ज लेने वाली संस्थाओं ने 1,063 करोड़ रुपये और चुकाने की पेशकश की है।

इससे पहले एनसीएलटी के दो सदस्यों ने अलग-अलग राय दी थी। इसके बाद मतभेद के निपटारे के लिए न्यायाधिकरण के अध्यक्ष ने शर्मा को तीसरे सदस्य के रूप में नियुक्त किया था। शर्मा ने एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस के नेतृत्व वाले असहमति जताने वाले ऋणदाताओं के दावों को खारिज कर दिया।

इन ऋणदाताओं ने भुगतान योजना को अव्यावहारिक और गैरकानूनी बताया था। एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस ने कहा था कि करीब 22,006.57 करोड़ रुपये के स्वीकृत दावों के मुकाबले प्रस्तावित योजना में कर्जदाताओं को केवल 6.25 करोड़ रुपये और प्रक्रिया संबंधी खर्च के लिए 25 लाख रुपये देने की पेशकश की गई है। शर्मा ने अपने 144 पृष्ठ के आदेश में कहा कि समाधान पेशेवर द्वारा किए गए मूल्यांकन के अनुसार चंद्रा की व्यक्तिगत संपत्ति की कीमत योजना के तहत प्रस्तावित राशि से काफी कम थी।

ऐसे में असहमति जताने वाले कर्जदाताओं के लिए योजना को खारिज करने पर अधिक राशि वसूलने की संभावना नहीं थी, क्योंकि उस स्थिति में चंद्रा को दिवालिया होना पड़ता और वह वित्तीय स्थिति सुधारकर भुगतान करने की स्थिति में नहीं रह पाते। एनसीएलटी ने कहा कि यदि योजना को मंजूरी देकर चंद्रा की दिवाला प्रक्रिया का समाधान किया जाता है और उन्हें फिर से आर्थिक रूप से सक्षम होने का अवसर मिलता है, तो आपत्ति जताने वाले कर्जदाताओं के लिए मूल कर्जदारों से अपना बकाया वसूलने की संभावना बेहतर होगी। मामला अब औपचारिक आदेश के लिए मूल दो-सदस्यीय पीठ के पास जाएगा।

यह प्रक्रिया कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 419(5) के तहत बहुमत की राय के अनुरूप होगी।

प्रमुख खबरें

Meta के नए नियम: रात 12 से सुबह 6 बजे तक बंद रहेंगे Kids Accounts, 2 घंटे की Daily Limit तय

BPSC TRE-4 Exam एक चरण में कराने का ऐलान, सम्राट चौधरी ने मानी मांग

Nepal Flood के बाद Glacial Lakes का वैज्ञानिक आकलन जरूरी, शोधकर्ताओं ने जताई चिंता

Sugar Mill Prices में 20% की भारी गिरावट, Retail Market में आम आदमी के लिए जल्द सस्ती होगी चीनी