Sucheta Kriplani Death Anniversary: भारत की पहली महिला मुख्यमंत्री थीं सुचेता कृपलानी, आजादी की लड़ाई में दिया था अहम योगदान

By अनन्या मिश्रा | Dec 01, 2024

आज ही के दिन यानी की 01 दिसंबर को भारत की पहली महिला मुख्यमंत्री रहीं सुचेता कृपलानी का निधन हुआ था। वर्तमान समय में भारत की राजनीति में महिलाओं की भूमिका और हिस्सेदारी बढ़ रही है। लेकिन उस दौरान जब देश आजादी की जंग लड़ रहा था, तब पुरुषों के साथ महिलाएं भी देश के लिए अपना योगदान दे रही थीं। उस दौर में जिस आजाद भारत के बाद पं. नेहरू, राजेंद्र प्रसाद थे तो उसी देश के पास इंदिरा गांधी और सुचेता कृपालानी जैसी महिलाएं भी थीं, जो देश और राज्य को संभालने की योग्यता और क्षमता दोनों रखती थीं। तो आइए जानते हैं उनकी डेथ एनिवर्सरी के मौके पर भारत की पहली महिला सीएम सुचेता कृपलानी के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में...

जन्म और शिक्षा

हरियाणा के अंबाला में एक बंगाली परिवार में 25 जून 1908 को सुचेता कृपलानी का जन्म हुआ था। इनके पिता का नाम एस.एन. मजुमदार था, जोकि ब्रिटिश सरकार के अधीन एक डॉक्टर थे। ब्रिटिश सरकार के अधीन कार्यरत होने के बाद भी इनके पिता राष्ट्रवादी व्यक्ति थे। सुचेता ने दिल्ली विश्वविद्यालय के इन्द्रप्रस्थ और सेंट स्टीफन कॉलेज से अपनी पढ़ाई पूरी की थी। वहीं पढ़ाई पूरी होने के बाद उन्होंने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में व्याख्याता के पद पर कार्य किया था।

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आजादी की लड़ाई में भूमिका

बता दें कि साल 1936 में सुचेता कृपलानी की शादी आचार्य जीवतराम भगवानदास कृपलानी के साथ हुई थी। शादी के बाद वह आजादी की लड़ाई में पूरी तरह से सक्रिय हो गई थीं। भारत छोड़ो आंदोलन के समय वह प्रथम मोर्चे पर खड़ी थीं। हर मौके पर वह देश की आजादी के लिए आवाज उठाती रहीं। वहीं देश के विभाजन के समय हुए दंगों में भी सुचेता कृपलानी ने गांधी जी के साथ मिलकर काम किया था।

महिलाओं का प्रतिनिधित्व

जब भारत के लिए संविधान बनना था, तो संविधान सभा का गठन हुआ। इसमें महिलाओं का प्रतिनिधित्व करने के लिए सुचेता कृपलानी को इसमें शामिल किया गया था। सुचेता कृपलानी ने भारत के संविधान में महिलाओं के अधिकार के लिए आवाज उठाई थी।

राजनीतिक जीवन

देश के आजाद होने के बाद सुचेता कृपलानी ने सक्रिय राजनीति में एंट्री मारी। फिर साल 1952 में सुचेता लोकसभा की सदस्य बनीं। फिर साल 1957 में वह नई दिल्ली विधानसभा सदस्य बनीं और फिर उनको लघु उद्योग मंत्रालय का कार्यभार दिया था। इसके बाद साल 1962 में कानपुर से उत्तर प्रदेश विधानसभा सदस्य चुनी गईं। वहीं साल 1963 में सुचेता कृपलानी यूपी की मुख्यमंत्री बनीं। ऐसा पहली बार था जब भारत में कोई महिला सीएम बनी हों। साल 1971 में उन्होंने राजनीति से संन्यास ले लिया।

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