By अंकित सिंह | Jul 04, 2026
लगभग दो दर्जन विपक्षी दलों ने भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत को पत्र लिखकर चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची के 'विशेष गहन संशोधन' (SIR) पर चिंता जताई है। उन्होंने आरोप लगाया है कि इस प्रक्रिया से लोकतंत्र कमजोर हो सकता है और सुप्रीम कोर्ट से दखल देने की मांग की है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने बताया कि इस संयुक्त पत्र पर 23 राजनीतिक दलों और एक निर्दलीय सांसद ने हस्ताक्षर किए हैं। उन्होंने कहा कि मुख्य न्यायाधीश से संपर्क करने का फैसला 8 जून को हुई 'इंडिया' गठबंधन की बैठक में लिया गया था।
उन्होंने तर्क दिया कि अदालतों ने बार-बार 'स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न' (विशेष गहन पुनरीक्षण) को सही ठहराया है और इसे चुनाव आयोग द्वारा समय-समय पर की जाने वाली एक कानूनी और सामान्य प्रक्रिया बताया है। उन्होंने कहा कि संवैधानिक नज़रिए से देखें तो वे अदालत के सामने एक भी तथ्यात्मक मुद्दा पेश नहीं कर पाए। इससे लोगों के मन में यह शक पैदा हुआ है कि संदिग्ध वोटरों के भरोसे राज्यों में सत्ता हासिल करने का उनका सपना अब टूट रहा है।
त्रिवेदी ने कांग्रेस पर इस मुद्दे पर अलग-अलग बातें कहने का भी आरोप लगाया। कांग्रेस नेता शशि थरूर का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि थरूर ने पहले माना था कि केरल में वोटर लिस्ट में सुधार की ऐसी ही प्रक्रिया से फ़र्ज़ी वोटरों को हटाने पर कांग्रेस को फ़ायदा हुआ था। उन्होंने कर्नाटक के डिप्टी सीएम डी.के. शिवकुमार के उस निर्देश का भी ज़िक्र किया जिसमें उन्होंने कांग्रेस कार्यकर्ताओं से SIR प्रक्रिया में सक्रिय रूप से भाग लेने को कहा था। उन्होंने सवाल उठाया कि पार्टी अब राष्ट्रीय स्तर पर इस प्रक्रिया का विरोध क्यों कर रही है।
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