By दिव्यांशी भदौरिया | May 26, 2026
आज यानी 26 मई को चौथा बड़ा मंगल है। बड़ा मंगल या बुढ़वा मंगल का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। इस दौरान हनुमान जी को प्रसन्न करने के लिए जातक कई उपाय भी करते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार हनुमान जी बड़े-बड़े संकट दूर कर देते है। जीवन में चल रही परेशानियां, रुकावट व बाधाओं को दूर करने के लिए हनुमान जी पूजा-अर्चना करना शुभ माना जाता है। इस खास दिन पर आप हनुमान जी कृपा पाने के लिए हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ जरुर करें। अगर आप भी जीवन में चल रहे दुखों-कष्टों से परेशान है, तो इस दिन सुंदरकांड की इन पंक्तियों का पाठ करें। ऐसा करने से आपका भय दूर होगा और दुख-दरिद्रता दूर होगी।
जामवंत के बचन सुहाए। सुनि हनुमान हृदय अति भाए॥
तब लगि मोहि परिखेहु तुम्ह भाई। सहि दुख कंद मूल फल खाई॥
इन पंक्तियों का अर्थ आपको बताते हैं- हनुमान जी के हृदय जामवंत जी के वचनों से खुश हुआ। उन्होंने कहा कि हे भाइयों! जब तक मैं माता सीता का पता लगाकर वापस नहीं आता, तब तक आप कंदू-मूल-फल खाकर मेरा इंतजार करें। इस पंक्ति का पाठ करने से आपको धैर्य मिलेगा और आगे बढ़ने का साहस मिलेगा।
कनक भूधराकार सरीरा। समर भयंकर अतिबल बीरा॥
सीता चरन बंदि तिन्ह धावा। अचलु महामुठि देइ गिरावा॥
इस पंक्ति का अर्थ है हनुमान जी का शरीर पर्वत के जैसा है, जो युद्ध में भयानक और पराक्रमी है। इन्होंने रक्षसों का वध किया और माता सीता के चरणों की वदना की। धार्मिक मान्यता के अनुसार, सुंदरकांड की इस पंक्ति का पाठ करने से व्यक्ति के रुके हुए सारे कार्य पूर्ण होते हैं।
प्रबिसि नगर कीजे सब काजा। हृदयं राखि कोसलपुर राजा॥
गरल सुधा रिपु करहिं मिताई। गोपद सिंधु अनल सितलाई॥
इस पंक्ति का अर्थ है कि अयोध्या के राजा श्री राम को दिल में बसा कर नगर में प्रवेश करें और सब काम कीजिए। ऐसा करने पर विष भी अमृत हो जाता है और जीवन में शत्रु भी मित्र बन जाते हैं। माना जाता है कि इस पंक्ति का पाठ करने से हनुमान जी कृपा प्राप्त होती है।