Sunil Gavaskar का बड़ा बयान, 'Shivam Dube अब फिनिशर नहीं, T20 के लिए एक संपूर्ण पैकेज हैं'

By Ankit Jaiswal | Jan 29, 2026

विशाखापट्टनम का मुकाबला भले ही भारत के पक्ष में नहीं गया, लेकिन इस मैच ने टीम इंडिया को एक अहम संकेत जरूर दिया। पूर्व कप्तान और दिग्गज बल्लेबाज़ सुनील गावस्कर का मानना है कि शिवम दुबे अब सिर्फ आखिरी ओवरों में बड़े शॉट लगाने वाले बल्लेबाज़ नहीं रह गए हैं, बल्कि टी20 क्रिकेट में भारत के लिए एक भरोसेमंद ऑलराउंड विकल्प के रूप में उभर रहे हैं।


बता दें कि न्यूज़ीलैंड के खिलाफ विशाखापट्टनम टी20 में भारत को 50 रन से हार का सामना करना पड़ा, लेकिन इस मुकाबले में दुबे की भूमिका पूरी तरह बदली हुई नजर आई। रायपुर में जहां उनसे अंत में तेजी लाने की उम्मीद थी और उन्होंने 18 गेंदों में 36 रन बनाकर वह जिम्मेदारी निभाई, वहीं विशाखापट्टनम में परिस्थितियां अलग थीं। भारत का स्कोर 63 रन पर चार विकेट था और रिंकू सिंह के आउट होते ही दबाव पूरी तरह दुबे पर आ गया।


मौजूद जानकारी के अनुसार सुनील गावस्कर ने मैच के बाद स्टार स्पोर्ट्स पर बातचीत में कहा कि दुबे ने इस चुनौती को बखूबी संभाला है। उन्होंने पहली ही गेंद पर लंबा छक्का जड़कर यह दिखा दिया कि वह दबाव से घबराने वाले खिलाड़ी नहीं हैं। गावस्कर के मुताबिक, आमतौर पर छठे या सातवें नंबर पर बल्लेबाज़ी करने वाले खिलाड़ी को कुछ ही ओवर मिलते हैं, लेकिन यहां दुबे को जल्दी आना पड़ा और उन्होंने शुरुआत से ही आक्रामक रुख अपनाया है।


गौरतलब है कि दुबे की इस पारी ने उनकी छवि में बड़ा बदलाव दिखाया है। उन्हें अक्सर स्पिन गेंदबाज़ों के खिलाफ खतरनाक माना जाता था, लेकिन इस मैच में उन्होंने तेज गेंदबाज़ों पर भी उतना ही असरदार खेल दिखाया है। उन्होंने महज़ 15 गेंदों में अर्धशतक पूरा किया, जो भारत की ओर से टी20 अंतरराष्ट्रीय में तीसरा सबसे तेज़ पचासा रहा है। इस सूची में युवराज सिंह और अभिषेक शर्मा जैसे नाम शामिल हैं।


दुबे ने 23 गेंदों में 65 रन की पारी खेलते हुए सात छक्के और तीन चौके लगाए और भारत को 82 रन पर पांच विकेट से 145 रन तक पहुंचाया है। हालांकि इससे पहले भारत ने 215 रन लुटाए थे और अंत में पूरी टीम 18.4 ओवर में 165 रन पर सिमट गई। दुबे का रनआउट भारत की आखिरी उम्मीद भी खत्म कर गया है।


हालांकि हार के बावजूद सुनील गावस्कर ने बड़ी तस्वीर पर जोर दिया है। उनके अनुसार दुबे की सबसे बड़ी ताकत यह है कि वह गेंद से भी योगदान दे सकते हैं। कुछ ओवर फेंकने की क्षमता उन्हें टीम के लिए बेहद उपयोगी बनाती है। गावस्कर का कहना है कि जल्दी बल्लेबाज़ी करने के अनुभव के बाद दुबे खुद को सिर्फ फिनिशर नहीं मानेंगे, बल्कि दबाव में पारी बनाने वाला खिलाड़ी भी समझेंगे।


दुबे की गेंदबाज़ी में भी लगातार सुधार देखने को मिला है। शुरुआती दौर में महंगे साबित होने वाले दुबे का औसत पिछले कुछ वर्षों में बेहतर हुआ है। 2024 में जहां उनका गेंदबाज़ी औसत 28.8 था, वहीं 2025 में यह घटकर 17.91 और 2026 में 19.66 तक आ गया है। पिछले तीन सालों में उन्होंने 36 मैचों में 20 विकेट लिए हैं और एशिया कप 2025 के फाइनल में पाकिस्तान के खिलाफ नई गेंद से भी गेंदबाज़ी की है।


मौजूदा सीरीज़ में भी उन्होंने छह ओवर में तीन विकेट झटके हैं। भले ही विशाखापट्टनम में नतीजा भारत के पक्ष में नहीं रहा, लेकिन शिवम दुबे का एक भरोसेमंद ऑलराउंडर के रूप में उभरना टी20 विश्व कप की तैयारियों के लिहाज़ से टीम इंडिया के लिए बड़ी राहत माना जा रहा हैं।

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