By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Aug 05, 2026
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) की महाराष्ट्र इकाई के अध्यक्ष सुनील तटकरे ने बुधवार को कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि विपक्षी दल ने उपमुख्यमंत्री और राकांपा प्रमुख सुनेत्रा पवार को ‘‘गूंगी गुड़िया’’ कहकर अपना ‘‘वैचारिक दिवालियापन’’ प्रदर्शित किया है। तटकरे ने संवाददाताओं से कहा कि केवल खेद जताना पर्याप्त नहीं है और राजनीतिक नेताओं को सार्वजनिक रूप से टिप्पणी करते समय संयम बरतना चाहिए। यह विवाद मंगलवार को शुरू हुआ, जब कांग्रेस की महाराष्ट्र इकाई ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा किया।
कांग्रेस ने इस मुद्दे पर उपमुख्यमंत्री और राकांपा प्रमुख सुनेत्रा पवार को ‘‘गूंगी गुड़िया’’ कहा, जिसके बाद राकांपा की कड़ी प्रतिक्रिया आई। हालांकि, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने मंगलवार रात सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि पवार के खिलाफ की गई टिप्पणी खेदजनक है और यह गलतफहमी के कारण हुई। तटकरे ने कहा, ‘‘इस तरह की टिप्पणी करके कांग्रेस ने अपना वैचारिक दिवालियापन उजागर किया है।
केवल खेद व्यक्त कर देने से मामला खत्म नहीं हो जाता। नेताओं को यह समझ होनी चाहिए कि क्या कहना है और क्या नहीं।’’ लोकसभा सदस्य तटकरे ने यह भी कहा कि संवाददाता सम्मेलन में केवल मुख्य वक्ता को ही बोलना चाहिए। उन्होंने यह टिप्पणी अपने ही दल के नेता धनंजय मुंडे की ओर इशारा करते हुए की और कहा कि पार्टी नेताओं से भविष्य में ऐसी परिस्थितियों में अधिक जिम्मेदाराना व्यवहार की अपेक्षा की जाती है।
उन्होंने कहा, ‘‘यह नहीं होना चाहिए था। केवल मुख्य वक्ता को ही बोलना चाहिए, उनके बगल में बैठे लोगों को नहीं। हमारे सहयोगी निश्चित रूप से भविष्य में जिम्मेदाराना व्यवहार करेंगे।’’ तटकरे ने कहा कि वह पहले यह जानने की कोशिश करेंगे कि वरिष्ठ नेता (धनंजय मुंडे) ने किस संदर्भ में बयान दिया था, हालांकि उन्होंने दोहराया कि संवाददाता सम्मेलन मुख्य वक्ता का होता है।
उन्होंने कहा, ‘‘मैं जानना चाहूंगा कि धनंजय मुंडे ने किस संदर्भ और किस वजह से बात की। आखिरकार संवाददाता सम्मेलन मुख्य वक्ता का होता है। बगल में बैठना ठीक है, लेकिन बगल में बैठकर प्रेस वार्ता में हिस्सा लेना मेरे विचार से उचित नहीं है।’’ तटकरे ने कहा कि संवाददाता सम्मेलन मुख्य वक्ता के नाम से आयोजित किया जाता है और मीडिया से बातचीत भी वही व्यक्ति करता है।
उन्होंने कहा कि यही ऐसी बातचीत का मूल नियम है। उन्होंने बताया कि उनकी अपनी प्रेस वार्ता के दौरान भी जब पत्रकार उनके बगल में बैठे लोगों से सवाल करते हैं, तो वह उन्हें उनसे ही सवाल पूछने के लिए कहते हैं। तटकरे ने कहा, ‘‘यह दोनों पक्षों के लिए एक परंपरा है और हमारे सहयोगी भविष्य में ऐसे अवसरों पर निश्चित रूप से अधिक जिम्मेदाराना व्यवहार करेंगे।