By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Sep 07, 2026
नयी दिल्ली, सात सितंबर उच्चतम न्यायालय ने पश्चिम बंगाल सरकार को तृणमूल कांग्रेस सांसद अभिषेक बनर्जी के निजी सहायक सुमित रॉय से साल्बोनी में भूमि हड़पने के मामले में पुलिस पूछताछ के संबंध में सीलबंद रिपोर्ट अदालत में जमा करने की अनुमति सोमवार को दे दी। इससे पहले सुनवाई के दौरान पश्चिम बंगाल सरकार ने आरोप लगाया था कि रॉय जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं। न्यायालय ने इससे पहले, 31 अगस्त को राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि वह रॉय से पूछताछ से जुड़े रिकॉर्ड पेश करे।
उनसे विस्तार से पूछताछ की गई, लेकिन वे गोलमोल जवाब देते रहे। मेरे पास बातचीत का लिखित ब्योरा है। इसे कल या परसों पेश किया जा सकता है।’’ मेहता की ओर से यह जानकारी तब दी गई जब रॉय का पक्ष रखने वाले अधिवक्ता ने वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन के अन्य अदालत में व्यस्त होने का हवाला देते हुए सुनवाई को कुछ देर के लिए टालने का अनुरोध किया।
सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि वह केवल पीठ के अवलोकन के लिए सीलबंद लिफाफे में विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने की अनुमति मांग रहे हैं। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट को सीलबंद लिफाफे में दाखिल करने का अनुरोध किया गया था क्योंकि पुलिस अभी जांच की जानकारी आरोपी के साथ साझा नहीं कर सकती। इस बीच, पीठ ने सॉलिसिटर जनरल की अपील स्वीकार करते हुए रॉय को गिरफ्तारी से मिली राहत की मियाद अगली सुनवाई तक बढ़ा दी।
पीठ तीन अगस्त को कलकत्ता उच्च न्यायालय द्वारा रॉय की साल्बोनी भूमि हड़प मामले में दाखिल अग्रिम जमानत याचिका खारिज किये जाने के खिलाफ की गई अपील पर सुनवाई कर रही थी। उच्चतम न्यायालय ने छह अगस्त को रॉय की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी थी। इससे पहले, शंकरनारायणन ने दलील दी थी कि पूरी पूछताछ की वीडियो रिकॉर्डिंग की गई है और उनके मुवक्किल (रॉय) ने पूछे गए सभी सवालों के जवाब दिए हैं।
रॉय के खिलाफ मामले में धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात, जालसाज़ी, जाली दस्तावेजों के इस्तेमाल और आपराधिक साजिश की धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है।