By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Oct 16, 2026
उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को कहा कि निजी नागरिक जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत चुनावी हलफनामों में गलत जानकारी देने या महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाने पर निर्वाचित उम्मीदवारों के खिलाफ आपराधिक शिकायत दर्ज करा सकते हैं। इसने कहा कि दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 195 के तहत लगाया गया प्रतिबंध ऐसे मामलों में शिकायत दर्ज कराने में बाधा नहीं बनेगा। सीआरपीसी की धारा 195 के तहत आपराधिक अदालतें कुछ विशिष्ट अपराधों का सीधे संज्ञान नहीं ले सकतीं, जब तक कि अधिकृत लोकसेवक या संबंधित अदालत की ओर से औपचारिक रूप से लिखित शिकायत दर्ज नहीं कराई जाती।
उच्च न्यायालय ने उनके द्वारा शैलेंद्र बेलडाले के खिलाफ दर्ज कराई गई आपराधिक शिकायत खारिज कर दी थी। बेलडाले बीदर निर्वाचन क्षेत्र से कर्नाटक विधानसभा के निर्वाचित सदस्य हैं। मडकी ने आरोप लगाया था कि बेलडाले ने 2023 के विधानसभा चुनाव में नामांकन पत्र के साथ दाखिल हलफनामे में अपने आवासीय पते के संबंध में गलत घोषणा की थी।
मडकी ने जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 125ए के तहत दंडनीय अपराध का आरोप लगाते हुए बेंगलुरु के अतिरिक्त मुख्य महानगर मजिस्ट्रेट के समक्ष दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 200 के तहत निजी शिकायत दर्ज कराई थी। कर्नाटक उच्च न्यायालय ने शिकायत खारिज करते हुए कहा था कि कथित अपराध के लिए कार्यवाही केवल निर्वाचन आयोग की शिकायत पर शुरू की जा सकती है। अदालत ने यह भी कहा था कि मतदाता ऐसी निजी आपराधिक शिकायत दर्ज कराने के बजाय चुनाव याचिका दायर कर सकता है।
फैसले में कहा गया कि ऐसे मामलों में शिकायत दर्ज कराने का अधिकार केवल लोकसेवकों तक सीमित करने वाला कोई अन्य वैधानिक प्रावधान नहीं है। इसके साथ ही, जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 125ए की भाषा भी इस निष्कर्ष का समर्थन करती है कि निजी शिकायत कानूनी रूप से स्वीकार्य है। हालांकि, उच्चतम न्यायालय ने निजी शिकायतों की वैधता के पक्ष में कानूनी सवाल का निपटारा करने के बावजूद बेलडाले के खिलाफ कार्यवाही दोबारा शुरू करने से इनकार कर दिया।