Supreme Court ने OIL को असम के Dibru Saikhowa मामले में नई याचिका दायर करने की दी छूट

By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Sep 02, 2026

(फाइल फोटो के साथ) नयी दिल्ली, दो सितंबर उच्चतम न्यायालय ने ऑयल इंडिया लिमिटेड (ओआईएल) को एक अंतरिम आवेदन वापस लेने और असम के डिब्रू-सैखोवा राष्ट्रीय उद्यान के नीचे हाइड्रोकार्बन निकालने के लिए विस्तारित पहुंच ‘ड्रिलिंग’ (ईआरडी) के उसके प्रस्ताव को केंद्र द्वारा खारिज किए जाने के फैसले को चुनौती देने के लिए नयी याचिका दायर करने की बुधवार को अनुमति दी। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची तथा न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ के समक्ष ओआईएल की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी ने आग्रह किया कि मामला बेहद जरूरी है और इसे सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाए। द्विवेदी ने कहा, ‘‘यह मामला बेहद जरूरी है क्योंकि यह क्षेत्र राष्ट्रीय उद्यान की सीमा के किनारे है।

यह 4,000 मीटर नीचे जाती है और फिर क्षैतिज रूप से आगे बढ़ती है।’’ उन्होंने कहा कि यह आवेदन 1995 के लंबित मामले ‘टी. एन. गोदावर्मन थिरुमुलपाद बनाम भारत संघ’ में दायर किया गया है। यह एक महत्वपूर्ण मुकदमा है, जिसने वन संरक्षण और पर्यावरण संबंधी न्यायशास्त्र को आकार देने में अहम भूमिका निभाई है। द्विवेदी ने मामले की तात्कालिकता पर जोर देते हुए कहा कि प्रस्तावित परियोजना देश की ऊर्जा जरूरतों के लिए महत्वपूर्ण है।

उन्होंने पीठ को बताया कि रजिस्ट्री अंतरिम आवेदन को संख्या नहीं दे रही है क्योंकि पहले इस लंबित मामले में ऐसे आवेदनों को स्वीकार नहीं करने का निर्देश दिया गया था। प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि यदि नया कारण उत्पन्न हुआ है तो आवेदक नयी याचिका दायर कर सकता है। उन्होंने कहा, ‘‘हम उस पूरे मामले को बंद करना चाहते थे।

अगर कोई नया कारण है तो नयी याचिका दायर करें और हम उस पर सुनवाई करेंगे। रजिस्ट्री अंतरिम आवेदन को सूचीबद्ध नहीं कर सकती क्योंकि इस संबंध में आदेश है।’’ द्विवेदी ने परियोजना के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि इसका संबंध देश की करीब तीन प्रतिशत तेल जरूरत से है। उन्होंने पीठ से अंतरिम आवेदन वापस लेने और नयी याचिका दायर करने की अनुमति देने का अनुरोध किया।

उन्होंने कहा कि मामले को दिन की कार्यवाही की शुरुआत या अंत में भी सुना जा सकता है। पीठ ने कहा, ‘‘अनुरोध के अनुसार अंतरिम आवेदन वापस लेने की अनुमति दी जाती है और नयी याचिका दायर करने की स्वतंत्रता दी जाती है।’’ सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी ने अपनी याचिका में वन सलाहकार समिति के फैसले और इसके बाद पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (एमओईएफसीसी) द्वारा तिनसुकिया जिले में परियोजना के लिए 0.069 हेक्टेयर वन भूमि के गैर-वानिकी इस्तेमाल की मंजूरी देने से इनकार करने के फैसले को चुनौती दी है। कंपनी ने कहा कि अधिकारियों ने उच्चतम न्यायालय के 26 अप्रैल, 2023 के उस फैसले को गलत तरीके से लागू किया, जिसमें राष्ट्रीय उद्यानों और वन्यजीव अभयारण्यों तथा उनकी सीमाओं से एक किलोमीटर के दायरे में खनन पर रोक लगाई गई थी।

ओआईएल के अनुसार, विस्तारित पहुंच ‘ड्रिलिंग’ के जरिये हाइड्रोकार्बन की खोज और उत्पादन को पारंपरिक खनन के समान नहीं माना जा सकता।

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