By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Sep 21, 2026
उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को तमिलनाडु सरकार से इस बारे में विचार करने को कहा कि क्या तंजावुर में शास्त्र विश्वविद्यालय द्वारा कथित तौर पर कब्ज़ा की गई 31.37 एकड़ सरकारी जमीन के बदले कोई उपयुक्त वैकल्पिक जमीन स्वीकार की जा सकती है। प्रधान न्यायाधीश, न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने कहा कि इस भूमि का इस्तेमाल सार्वजनिक उद्देश्य से जुड़े शैक्षणिक संस्थान के लिए किया जा रहा है। पीठ ने यह भी सवाल किया कि राज्य सरकार संस्थान को खाली कराने और उसे ध्वस्त करने पर क्यों जोर दे रही है।
शास्त्र तंजावुर के तिरुमलाईसमुद्रम में स्थित एक प्रमुख निजी मानद विश्वविद्यालय है।