By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Jul 13, 2026
उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को सरकार और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए पूछा कि प्रेम संबंधों के कारण लड़का-लड़की के घर छोड़कर भागने की घटनाओं को आखिर कैसे रोका जा सकता है। इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने आपसी सहमति से शारीरिक संबंध बनाने वाले किशोरों के खिलाफ पॉक्सो (यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण) अधिनियम के प्रावधानों के कथित दुरुपयोग पर गंभीर चिंता जताई।
शीर्ष अदालत किशोरों के निजता के अधिकार से जुड़े एक स्वतः संज्ञान मामले की सुनवाई कर रही थी। यह कानूनी प्रक्रिया कलकत्ता उच्च न्यायालय के 2023 के एक विवादास्पद फैसले के बाद शुरू हुई थी, जिसमें किशोर लड़कियों को अपनी यौन इच्छाओं पर नियंत्रण रखने की सलाह दी गई थी। इस फैसले को 2024 में उच्चतम न्यायालय ने खारिज कर दिया था और किशोरों की निजता के अधिकार पर कई निर्देश जारी किए थे।
मामले में अदालत की सहायता कर रही वरिष्ठ अधिवक्ता माधवी दीवान ने बताया कि पॉक्सो मामलों में व्यवस्था की विफलता को लेकर एक विस्तृत रिपोर्ट दाखिल की गई है। उन्होंने पीठ को एक उदाहरण दिया जिसमें एक नाबालिग लड़की 25 वर्षीय पुरुष के साथ भाग गई थी, लेकिन अब वह उसके साथ खुश है और उनका एक बच्चा भी है। दीवान ने दलील दी कि कानून के दुरुपयोग को रोकने के लिए एक ठोस व्यवस्था की जरूरत है क्योंकि आपसी सहमति से रिश्तों में शामिल किशोरों को भी जेल भेज दिया जाता है।
अदालत ने अपनी टिप्पणी में यह भी कहा कि किशोरों के बीच शारीरिक संबंध वर्ष 2012 में सहमति की कानूनी उम्र 16 से बढ़ाकर 18 वर्ष किए जाने से पहले भी बन रहे थे। पीठ ने कहा कि सहमति की उम्र बढ़ने के बाद ऐसे मामले कानूनी रूप से अवैध हो गए हैं। न्यायालय ने जोर दिया कि इस दिशा में दिए जाने वाले निर्देश व्यावहारिक होने चाहिए ताकि किशोरों के कल्याण और बाल संरक्षण के उपायों को प्रभावी बनाया जा सके। मामले की अगली सुनवाई 17 जुलाई को होगी।