By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Jul 31, 2026
सड़कों पर आवारा पशुओं के कारण होने वाली दुर्घटनाओं पर चिंता जताते हुए उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को केंद्र और राज्य सरकारों को ऐसी दुर्घटनाओं में मुआवजे के भुगतान के लिए एक तंत्र विकसित करने का निर्देश दिया। न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने कई निर्देश जारी किए और कहा कि इन पशुओं के मालिकों को जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए तथा यह सुनिश्चित करना चाहिए कि पशु हर रोज दिन खत्म होने पर अपने निर्दिष्ट आवास पर लौट आएं। पीठ ने कहा, ‘‘सभी राज्य जिन्होंने मवेशियों से संबंधित कानून बनाए हैं, उन्हें अक्षरशः और तत्काल कार्यान्वयन सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाने चाहिए।
महिला के पति को सड़क पर चलते समय एक आवारा सांड ने टक्कर मार दी थी और सिर में चोट लगने से उनकी मौत हो गई थी। पति की मृत्यु के बाद महिला ने पर्याप्त मुआवजे की मांग करते हुए उच्च न्यायालय में याचिका दायर की। एकल-न्यायाधीश पीठ ने मृतक की आय, आयु और अन्य प्रासंगिक कारकों के आधार पर मोटर वाहन अधिनियम, 1988 के तहत मुआवजे के अनुदान को नियंत्रित करने वाले सिद्धांतों को लागू करके मुआवजे का आकलन किया और मुआवजा दिए जाने का आदेश दिया।
हालांकि, खंडपीठ ने एकल-न्यायाधीश पीठ के आदेश को रद्द कर दिया था।