By अभिनय आकाश | Feb 03, 2026
सुप्रीम कोर्ट ने व्हाट्सएप और उसकी मूल कंपनी मेटा को चेतावनी दी कि डेटा साझा करने के बहाने नागरिकों के निजता के अधिकार से समझौता नहीं किया जा सकता। ये टिप्पणियां सर्वोच्च न्यायालय द्वारा व्हाट्सएप और मेटा द्वारा दायर याचिकाओं की सुनवाई के दौरान की गईं। सुनवाई के दौरान, सुप्रीम कोर्ट ने इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) को मामले में पक्षकार बनाया। सर्वोच्च न्यायालय ने यह भी कहा कि वह इस मामले में 9 फरवरी को अंतरिम आदेश पारित करेगा।
सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की कि प्रौद्योगिकी क्षेत्र की दिग्गज कंपनियों की निजता संबंधी शर्तें इतनी चालाकी से तैयार की जाती हैं कि आम नागरिक उन्हें पूरी तरह से समझ नहीं पाते हैं। न्यायालय ने सवाल किया, "ऑप्ट-आउट का सवाल ही कहां उठता है?
सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि वह प्रौद्योगिकी कंपनियों को असमान समझौतों से जुड़े मामलों में उपभोक्ता डेटा साझा करने की अनुमति नहीं देगा।